एचपीयू के स्थापना दिवस पर उत्कृष्ट शिक्षकों-कर्मियों का सम्मान

By: Jul 23rd, 2026 12:02 am

राज्यपाल बोले—उच्च शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण और समाज सेवा भी, शोध व नवाचार पर दिया जोर

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के 57वें स्थापना दिवस समारोह का दूसरा सत्र बुधवार को विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित हुआ। समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता मुख्य अतिथि रहे, जबकि कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अपने संबोधन में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक वातावरण और प्राकृतिक परिवेश इसे देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल करता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। साथ ही विद्यार्थियों से आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ऊर्जा, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देने पर बल दिया। समारोह में श्रेष्ठ शिक्षक, श्रेष्ठ शोधकर्ता और उत्कृष्ट गैर-शिक्षक कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा पद्मश्री विद्यानंद सराईक, पद्मश्री नेक राम शर्मा और प्रो. राजीव चौहान को भी प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

सांस्कृतिक संध्या में दिखी हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सायंकाल विश्वविद्यालय सभागार में रामानुजन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भारतीय गणित केंद्र तथा पहाड़ी संस्कृति एवं धरोहर केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस सत्र के मुख्यातिथि कुलपति आचार्य महावीर सिंह रहे, जबकि स्वागताध्यक्ष अधिष्ठाता अध्ययन आचार्य बाल कृष्ण शिवराम रहे। कार्यक्रम में डॉ. विजय स्टोक्स ने पहाड़ी संस्कृति पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। पद्मश्री से सम्मानित विद्यानंद सरैक की विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति तथा डॉ. मदन झल्ला द्वारा प्रस्तुत पहाड़ी लोक संगीत ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक संध्या ने हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा एवं विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।


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