कांगड़ा की गुहार; फाटक हटाइए, ट्रेन नहीं
’धरोहर बचाओ’ मुहिम, डलहौजी रोड तक ट्रेन सीमित करने के प्रस्ताव पर जनता नाराज
कार्यालय संवाददाता-बैजनाथ
पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेल सेवा को डलहौजी रोड स्टेशन तक सीमित किए जाने की संभावित योजना का कांगड़ा घाटी में विरोध तेज हो गया है। क्षेत्र के लोगों, सामाजिक संगठनों और नियमित यात्रियों का कहना है कि यह रेल लाइन केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि कांगड़ा घाटी की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक पहचान और हजारों लोगों की जीवनरेखा है। लोगों ने रेलवे मंत्रालय से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर रेल सेवा को पहले की तरह पठानकोट रेलवे स्टेशन से संचालित रखने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पठानकोट शहर में लंबे समय से रेलवे फाटकों के कारण यातायात जाम की समस्या बनी हुई है, जिससे आम नागरिकों, मरीजों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि उनका मानना है कि इस समस्या का समाधान नैरोगेज रेल सेवा को सीमित करना नहीं, बल्कि आधुनिक आधारभूत सुविधाओं का विकास करना है।
लोगों का कहना है कि यदि ट्रेन का प्रारंभिक स्टेशन पठानकोट के बजाय डलहौजी रोड कर दिया गया तो हिमाचल, पंजाब और अन्य राज्यों से आने-जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त असुविधा होगी। यात्रियों को पठानकोट से डलहौजी रोड स्टेशन तक पहुंचने के लिए टैक्सी या अन्य निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। मुंबई, दिल्ली और अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों के साथ-साथ सेना में कार्यरत जवानों और छुट्टी पर अपने घर लौटने वाले सैनिकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। जनता ने रेलवे मंत्रालय के समक्ष कई व्यावहारिक सुझाव भी रखे हैं। उनका कहना है कि जहां-जहां रेलवे फाटक यातायात में बाधा बन रहे हैं, वहां रेलवे ओवरब्रिज या अंडरपास बनाए जाएं, ताकि सडक़ और रेल यातायात दोनों सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
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