राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच: शोभा ओझा
स्टाफ रिपोर्टर – धर्मशाला
महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर मंदिर निर्माण और चंदे में कथित अनियमितताओं की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के नाम पर राजनीति करने वालों को अब भगवान श्रीराम ही डूबोएंगे। धर्मशाला में रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में शोभा ओझा ने कहा कि पहले आक्रमणकारी देश के मंदिरों को लूटते थे, लेकिन अब मंदिरों की कथित लूट उनके अपने कर्ता-धर्ता ही कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने से तथ्यों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। करोड़ों रुपए के कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित समिति से कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे इस बात का संकेत हैं कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि गंभीर अनियमितताओं का है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में केंद्र सरकार की भूमिका रही है, इसलिए सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
शोभा ओझा ने सवाल उठाया कि ट्रस्ट को सूचना के अधिकार कानून के दायरे से बाहर रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्यों की नियुक्ति भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस मामले में जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेत्री ने दावा किया कि राम मंदिर से जुड़े कथित घोटाले के संबंध में कई खुफिया रिपोर्ट प्रधानमंत्री को भेजी गईं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं, और उनके नाम पर जुटाए गए धन के दुरुपयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच होना देशहित और जनभावनाओं के सम्मान के लिए आवश्यक है।
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