बंगाणा बीडीसी पर लहराया भगवा… सुषमा अध्यक्ष और विकास के सिर सजा उपाध्यक्ष का ताज
दो महीने बाद हुए चुनाव में बीजेपी ने मार ली बाजी; कांग्रेस नहीं बना पाई सही रणनीति, पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने दी बधाई
स्टाफ रिपोर्टर-बंगाणा
उपमंडल बंगाणा में ब्लॉक विकास समिति (बीडीसी) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव ने स्थानीय राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार और क्षेत्र में कांग्रेस विधायक होने के बावजूद भाजपा ने बीडीसी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर कब्जा जमाकर राजनीतिक बढ़त हासिल की है। भाजपा समर्थित प्रत्याशी सुषमा ने अध्यक्ष पद पर 13 मत प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। बंगाणा बीडीसी उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा समर्थित विकास को 19 में से 12 मिले। जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी को भी 7 मत प्राप्त हुए। चुनावी गणित के अनुसार भाजपा के एक सदस्य का वोट क्रॉस होने की चर्चा रही, लेकिन इसके बावजूद विकास उपाध्यक्ष बनने में सफल रहे। इस चुनाव ने यह संकेत दिया कि भाजपा का संगठनात्मक आधार मजबूत बना हुआ है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित खेमे को अध्यक्ष पद पर 6 और उपाध्यक्ष पद पर 7 मत मिलने मिले।
भाजपा की संगठनात्मक क्षमता उभरी
बंगाणा बीडीसी चुनाव लगभग दो माह की प्रतीक्षा के बाद संपन्न हुए। माना जा रहा था कि इस दौरान सत्ता पक्ष अपने पक्ष में माहौल बनाने और समीकरण बदलने में सफल होगा, लेकिन चुनाव परिणाम इसके विपरीत रहे। पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर और कांग्रेस विधायक विवेक शर्मा के समर्थित बीडीसी सदस्यों ने मिलकर चुनाव लड़ा, फिर भी उनके प्रत्याशी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जीत हासिल नहीं कर सके। वहीं भाजपा नेता दविंदर कुमार भुट्टो ने संगठन समर्थक सदस्यों को एकजुट रखते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद भाजपा की झोली में डाल दिए। राजनीतिक गलियारों में इस जीत को भाजपा की रणनीतिक सफलता और भुट्टो की संगठन क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।
कुटलैहड़ कांग्रेस को आत्म मंथन की सख्त जरूरत
बंगाणा बीडीसी चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय बन गए हैं। प्रदेश में सरकार होने और क्षेत्र में कांग्रेस विधायक के बावजूद यदि पार्टी अपने समर्थित प्रत्याशियों को जीत नहीं दिला सकी, तो यह संगठनात्मक कमजोरी और राजनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर सत्ता का लाभ कांग्रेस को क्यों नहीं मिला और बीडीसी सदस्य पार्टी के साथ मजबूती से क्यों नहीं खड़े हुए। दूसरी ओर भाजपा ने यह साबित किया कि मजबूत संगठन, प्रभावी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के दम पर सत्ता के बिना भी चुनाव जीते जा सकते हैं। बंगाणा बीडीसी के परिणाम आने वाले पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माने जा रहे हैं। भाजपा इस जीत को अपने जनाधार और संगठन की मजबूती के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि कांग्रेस के सामने अब अपने संगठन, रणनीति और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर सत्ता का लाभ कांग्रेस को क्यों नहीं मिला और बीडीसी सदस्य पार्टी के साथ मजबूती से क्यों नहीं खड़े हुए। दूसरी ओर भाजपा ने यह साबित किया कि मजबूत संगठन, प्रभावी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के दम पर सत्ता के बिना भी चुनाव जीते जा सकते हैं।
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