सुप्रीम कोर्ट ने रोके दो हाई कोर्ट के फैसले, गौहत्या पर पूर्ण रोक के आदेश को पलटा, असम में विदेशी… पढ़ें खबर
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें बकरीद या किसी दूसरे दिन तमिलनाडु राज्य में कहीं भी गाय या बछड़े के वध पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली तमिलनाडु राज्य की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया। साथ ही अदालत ने अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें राज्य में गाय और बछड़ों के वध पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। बैंच ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट के आदेश, जिसमें राज्यभर में प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी, उसके आखिरी पैराग्राफ में शुरुआती आधार में सुधार की जरूरत है।
राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के उलट है, जो सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर 10 साल से ज्यादा उम्र की उन गायों के वध की अनुमति देता है, जो काम करने और प्रजनन के लिए अनुपयुक्त हैं।
असम में विदेशी घोषित 27 लोगों को राहत, दोबारा होगी सुनवाई

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने से जुड़े मामलों में गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने का फैसला निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि नागरिकता और विदेशी होने का सवाल संविधान और कानून से जुड़ा बेहद महत्त्वपूर्ण विषय है। सभी मामले दोबारा सुनवाई के लिए फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (विदेशी न्यायाधिकरण) को भेज दिए गए है।
इन लोगों को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था। उन्होंने इस फैसले को गुवाहाटी हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद सभी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। हालांकि कोर्ट ने यह नहीं तय किया है कि अपीलकर्ता भारतीय नागरिक हैं या नहीं। उनके दावों, डॉक्यूमेंट्स और सबूतों की सत्यता या पर्याप्तता पर भी कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की है। इन सभी की जांच अब फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल करेगा। उसी के आधार पर फैसला सुनाया जाएगा।
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