पीसीबी की एनओसी के बिना 100 भवनों के नक्शे लौटाए
अब पीसीबी की अनुमति के बाद ही सिंगल अंब्रेला कमेटी में होगी सुनवाई
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
राजधानी शिमला में भवन निर्माण के लिए नक्शा पास करवाना अब और सख्त हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की अनिवार्यता लागू होने के बाद नगर निगम शिमला ने करीब 100 भवनों के नक्शे आवेदकों को वापस भेज दिए हैं। इन भवनों के नक्शों की आगे की प्रक्रिया अब तभी शुरू होगी, जब भवन मालिक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जरूरी एनओसी लेकर निगम में दस्तावेज जमा करवाएंगे। एनओसी मिलने के बाद ही इन नक्शों को सिंगल अंब्रेला कमेटी की बैठक में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने भवनों के नक्शे स्वीकृत करने की प्रक्रिया में प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित नियमों को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। इसके तहत अब भवन मालिकों को नक्शा पास करवाने की प्रक्रिया में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी भी प्रस्तुत करनी होगी।
एनओसी के बिना निगम भवन निर्माण के नक्शे को आगे स्वीकृति की प्रक्रिया में नहीं ले जाएगा। नए नियम का असर केवल नए आवेदन करने वालों पर ही नहीं पड़ा है। नगर निगम में पहले से लंबित पड़े भवन नक्शों को भी इसकी जद में लाया गया है। करीब 100 ऐसे नक्शे, जिनकी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी और जिनमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी उपलब्ध नहीं थी, उन्हें निगम की ओर से वापस कर दिया गया है। संबंधित भवन मालिकों को आवश्यक एनओसी लेने के बाद दस्तावेज दोबारा जमा करवाने के लिए कहा गया है। नगर निगम अब भवन नक्शों की प्रक्रिया में किसी तरह की कमी नहीं छोडऩा चाहता। आवेदक जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेकर निगम में दस्तावेज जमा करेंगे, इसके बाद ही संबंधित नक्शे को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। सभी जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद नक्शा सिंगल अंब्रेला कमेटी की बैठक में रखा जाएगा। कमेटी में विचार के बाद ही भवन नक्शे की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कल होगी सिंगल अंब्रेला कमेटी की बैठक
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद अब कल यानी 14 अगस्त को सिंगल अंब्रेला कमेटी की बैठक होने वाली है। इस बैठक में करीब 60 नक्शों को लाया जा सकता है। हालांकि इसमें वही नक्शे लाए जाने हैं जो रिवाइज हों या फिर जिन्होंने पीसीबी की एनओसी ले ली है। साथ ही इस बैठक में कंप्लिशन रिपोर्ट के लिए भी नक्शे लाए जाने वाले हैं। यह बैठक आयुक्त सङ्क्षचन कंवल की अध्यक्षता में होगी।
भवन मालिकों की बढ़ी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के बाद भवन मालिकों को नक्शा जमा करवाने से पहले जरूरी विभागीय अनापत्तियां जुटानी होंगी। इससे दस्तावेजों की कमी के कारण नक्शों के लंबित रहने की समस्या को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। निगम प्रशासन की ओर से आवेदकों को नई प्रक्रिया की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि वे आवश्यक दस्तावेज पूरे कर सकें। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया को लागू किया जा रहा है। भवन निर्माण से पहले पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी वजह से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी को नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया में अनिवार्य किया गया है। अब शिमला में भवन मालिकों को पहले पीसीबी की एनओसी लेनी होगी, उसके बाद ही उनका नक्शा नगर निगम की सिंगल अंब्रेला कमेटी के सामने मंजूरी के लिए पहुंच सकेगा।
सडक़ चौड़ीकरण से जलस्रोत-श्मशान घाट का रास्ता तबाह
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नारकंडा के समीप बिथल-औडी सडक़ चौड़ीकरण के दौरान ग्रामीणों को हो रही परेशानी पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। अदालत ने भदासा-कोफर धार और नौला के ग्रामीणों की शिकायत पर जनहित याचिका दर्ज करते हुए यह कार्रवाई की। ग्रामीणों का आरोप है कि सडक़ चौड़ीकरण के दौरान खुदाई से निकलने वाले मलबे के लिए उचित डंपिंग व्यवस्था नहीं की गई। इससे नौला गांव के प्राकृतिक जलस्रोत नष्ट हो गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सडक़ निर्माण में लापरवाही से भदासा-कोफर धार के संयुक्त श्मशान घाट को जाने वाला रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया है। उन्होंने बागबानी मार्ग से श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते को जल्द बहाल करने की मांग की है।
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