स्कूल सुधारने का अभियान और विकास

By: Aug 29th, 2026 12:02 am

सीजेपी की मांग पर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने सरकारों को देश की असली सच्चाई से सामना करने के लिए मजबूर कर दिया। वरना इससे पहले तो लग ही नहीं रहा था कि देश की परीक्षा प्रणाली और स्कूलों तथा शिक्षा की नरक होती हालत भी कोई मुद्दा हो सकता है। देश की सरकारों के लिए यह कोई बड़ा मुद्दा था ही नहीं, इसे नई पीढ़ी के युवाओं ने जबरन सरकार के गले में डाल कर यह एहसास कराया कि यह बड़ा मुद्दा है। अभी सिर्फ परीक्षा, स्कूल, शिक्षा ही मुद्दा नहीं हैं। देश में समस्याओं की भरमार है। सडक़, बिजली, पानी, रोजगार, स्कूल, कॉलेज, अस्तपताल और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मौजूद हैं। बस जरूरत इन मसलों पर सडक़ों पर उतरने की है, सरकारें भी सडक़ पर आ जाएंगी। अब आंदोलनों के जरिए ही जनता की मांगें मनवाई जा सकती हैं…

अब वह दौर आ गया है कि वोट देने के साथ ही देश की समस्याओं को लेकर सरकारों की नींद खोलनी के लिए आम लोगों को सडक़ों पर उतरना पड़ेगा। संख्या बल का इसमें ज्यादा महत्व नहीं है। मुठ्ठी भर लोग भी ताकतवर सरकारों से जनहित में अपनी बात मनवा सकते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और उनके समर्थक जेन-जी के युवाओं ने देश भर में स्कूलों की दयनीय हालत का मुद्दा उठा कर यह साबित कर दिया कि चंद संघर्षशील नौजवान सरकारों का ध्यान आकर्षित करने और समस्या का समाधान कराने में कुछ हद तक कामयाब हो सकते हैं। सीजेपी ने देश भर में स्कूलों की खराब हालत को सुधारने के लिए अभियान चलाने की घोषणा की थी। इसी के तहत सीजेपी समर्थक जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा गांव के एक सरकारी स्कूल की हालत जानने के लिए पहुंचे।

यह स्कूल भैंसों के बाड़े में टीन शेड के नीचे चल रहा था। हालांकि सीजेपी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को स्थानीय भाजपा विधायक के समर्थकों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उनके साथ हाथापाई की गई। उनकी गाडिय़ों के शीशे फोड़ दिए गए। इसके बावजूद सीजेपी स्कूल की हालत मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए देश को बताने में कामयाब हो गई। इस स्कूल को एक बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया। इसका भवन बनाने की घोषणा की गई। चंद सीजेपी कार्यकर्ता तमाम दुश्विारियों के बावजूद स्कूलों के मुद्दे को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने में कामयाब हो गए। जयपुर के स्कूल की हालत के बाद देश भर में सोशल मीडिया पर जर्जर स्कूलों की बाढ़ आ गई।

राज्यों की सरकारें विकास की पोल खुलने से बैचेन हो गर्इं। सोशल मीडिया पर स्कूलों की हालत को लेकर सरकारों की जम कर खिंंचाई की गई। स्कूलों की हालत सामने आने के बाद राज्यों में विकास और तरक्की की असलियत उजागर हो गई। सरकारों को फजीहत के बाद स्कूलों की सुध लेने की घोषणा करने पर मजबूर होना पड़ गया। जयपुर के स्कूल की दुर्दशा का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने के बाद राजस्थान की भजन लाल सरकार ने स्कूलों की सुध ली। राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रदेश में 3587 नई स्कूल बिल्डिंग और 83783 नए क्लासरूम बनाए जाने की घोषणा की। राजस्थान के 22589 विद्यालयों में व्यापक निर्माण कर बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया जाएगा।

वहीं, स्कूलों में जरूरी सुविधाओं के विस्तार के लिए 13616 नए शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। सरकारी विद्यालयों के कायाकल्प के लिए करीब 12500 करोड़ रुपए के बजट से आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना है। फिलहाल स्कूलों से जुड़े करीब 3006 करोड़ रुपए के विकास कार्य प्रक्रिया में हैं। सीजेपी के स्कूल सुधारो अभियान के बाद ही उत्तर प्रदेश में सरकार ने 3126 परिषदीय व उच्च प्राथमिक स्कूलों का पुनर्निर्माण व मरम्मत 604 करोड़ रुपए से कराए जाने की घोषणा की। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए 302 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी कर दी। इसमें खराब व जर्जर हो चुके भवनों की जगह नई बिल्डिंग का निर्माण कराया जाएगा। परिषदीय प्राथमिक विद्यालय पर 15.36 लाख रुपए खर्च होंगे। 2243 परिषदीय प्राथमिक स्कूलों की मरम्मत पर कुल 344.52 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

इसकी पहली किस्त के रूप में 172.26 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। शासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक 72 विद्यालयों में जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण, मरम्मत व अवस्थापना सुविधाओं के लिए विभाग की ओर से 9.62 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। इसी तरह झारखंड और बिहार में पेपर लीक व धांधली के मामलों के बाद युवाओं के धरने-प्रदर्शन के बाद दोनों राज्यों की सरकारों को परीक्षाएं निरस्त करने पर विवश होना पड़ गया। झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार ने छात्र आंदोलनों के बाद जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया। सरकार ने अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतों के बाद कुल 22 से अधिक परीक्षाओं को रद्द किया है तथा अन्य पर जांच बिठाई है। बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार ने 4500 पदों के लिए हुई सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की ऑनलाइन परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के कारण रद्द कर दिया गया। इससे पहले केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम 2026 लागू किया।

इसमें परीक्षा में व्यक्तिगत रूप से नकल करने या गलत तरीके अपनाने पर 5 से 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है। संगठित रूप से पेपर लीक कराने या धांधली करने वाले गिरोहों के लिए 7 से 10 वर्ष की कैद और 1 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। परीक्षा आयोजित करने वाली लापरवाह या दोषी एजेंसियों पर 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना और परीक्षा कराने पर 8 वर्ष तक की रोक लग सकती है। मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाए जाने की घोषणा की गई।

सीजेपी की मांग पर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने सरकारों को देश की असली सच्चाई से सामना करने के लिए मजबूर कर दिया। वरना इससे पहले तो लग ही नहीं रहा था कि देश की परीक्षा प्रणाली और स्कूलों तथा शिक्षा की नरक होती हालत भी कोई मुद्दा हो सकता है। देश की सरकारों के लिए यह कोई बड़ा मुद्दा था ही नहीं, इसे नई पीढ़ी के युवाओं ने जबरन सरकार के गले में डाल कर यह एहसास कराया कि यह बड़ा मुद्दा है। अभी सिर्फ परीक्षा, स्कूल, शिक्षा ही मुद्दा नहीं हैं। देश में समस्याओं की भरमार है। सडक़, बिजली, पानी, रोजगार, स्कूल, कॉलेज, अस्तपताल और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मौजूद हैं। बस जरूरत इन मसलों पर सडक़ों पर उतरने की है, सरकारें भी सडक़ पर आ जाएंगी। अब आंदोलनों के जरिए ही जनता की मांगें मनवाई जा सकती हैं।

योगेंद्र योगी

स्वतंत्र लेखक


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