पर्यटन की अधूरी तलाश

By: Aug 29th, 2026 12:02 am

पर्यटकों की आमद का एक नक्शा विधानसभा सत्र में उभरा है। पिछले तीन साल में हिमाचल में 7.59 पर्यटक आए जबकि इस दौरान 262824 विदेशी सैलानी भी यहां आए। आंकड़ों की दृष्टि से आबादी से दोगुना पर्यटक आकर्षित करके हिमाचल अपनी संभावनाओं और क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन ‘क्वालिटी टूरिज्म’ के नजरिये से अभी व्याख्या होनी बाकी है। हिमाचल की खूबी यह है कि यहां पर्यटन आगमन के कई कारण हैं, फिर भी हम मार्केटिंग में पीछे हैं। कुछ ऐसे सर्किट हैं जिन्हें हिमाचल ने अहमियत ही नहीं दी। सभी मौसम और सभी कारणों के पर्यटन का संतुलन बहुत जरूरी है ताकि हम हाई एंड टूरिज्म को आमंत्रित कर सकें। बेशक पिछले तीन सालों में दो लाख 65 हजार के करीब विदेशी पर्यटक हिमाचल आए, लेकिन इनके द्वारा खर्च की गई राशि अति उत्तम नहीं। प्राय: बजट टूरिस्ट ही हिमाचल आ रहे हैं। कसोल और धर्मकोट में आ रहे विदेशी पर्यटक कई बार भारतीय सैलानियों से भी कम खर्चीले होते हैं। दूसरी ओर पर्यटकों की बढ़ती तादाद में मंदिरों के दर्शन की रूटीन ही नजर आती है। तीसरे सप्ताहांत पर्यटन की मंजिलें केवल कुछ स्थलों पर ही रहती हैं। चौथे युवा पर्यटकों का आगमन सीमित गतिविधियों के परिप्रेक्ष्य में पूरे हिमाचल का प्रतिनिधत्व नहीं करता है। ऐसे में हिमाचल में पर्यटन की तलाश अधूरी है। यह आंकड़ों की जुबान से भले ही अच्छी लगे, लेकिन गुणवत्ता के आधार पर हिमाचल के संदर्भ अभी खाली हैं। हिमाचल की खोज जिस दिन हाई एंड टूरिस्ट करेगा, उस दिन पर्यटन की आर्थिक भागीदारी बढ़ जाएगी। दूसरी ओर सप्ताहांत पर्यटन के साथ-साथ पूरे हफ्ते या इससे ज्यादा विश्राम का पर्यटन फैले, तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

हिमाचल में हाई एंड पर्यटन की जरूरतें अभी समझी ही नहीं गर्इं। ट्राइबल, सांस्कृतिक एवं धरोहर पर्यटन को महत्त्व मिले, तो विविध आकर्षणों की तरफ विदेशी दौड़े आएंगे। शिमला के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्त्व को देखते हुए सबसे अधिक विदेशी पर्यटक आते हैं, जबकि धर्मशाला, डलहौजी, मकलोडगंज, मनाली व कसौली में विदेशी बजट टूरिस्ट ही आ रहे हैं। हिमाचल में अधिक स्टे के लिहाज से युवा पर्यटक या यूं कहें कि कारपोरेट जगत से जुड़े युवा आ रहे हैं। इनकी जरूरतें हालांकि सीमित हैं, फिर भी इस श्रेणी के पर्यटक ज्यादा दिनों के लिए बार-बार हिमाचल आ रहे हैं। हिमाचल में देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए साहसिक व खेल पर्यटन भी सौगात बन रहा है। अकेले धर्मशाला में ही आईपीएल तथा अन्य क्रिकेट मैचों के जरिए हर साल दो लाख के करीब देशी-विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं। हाई एंड पर्यटक की तलाश में हिमाचली अधोसंरचना में तेजी से बदलाव आ रहा है, लेकिन महापर्यटन की दृष्टि से कई प्रयास करने होंगे। महामहिम दलाई लामा की उपस्थिति से लाभ उठाते अगर काल चक्र आयोजन के लिए स्थायी सुविधाएं कहीं धर्मशाला-मनाली के बीच विकसित की जाएं, तो यह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्र्र्यटन की नई मंजिल हो सकता है। पौंग तथा अन्य कृत्रिम झीलों में साहसिक खेलों तथा अन्य सुविधाओं का विस्तार हो, तो यह पर्यटन के वार्षिक मेलों का प्रसार करेगा। मंदिरों की आय से धार्मिक पर्यटन की रूपरेखा में गुणवत्ता, धार्मिक-सांस्कृतिक एहसास में बढ़ोतरी की जाए, तो हाई एंड पर्यटन बढ़ेगा। हिमाचल में फोरलेन मार्गों के विकास के साथ हाई एंड पर्यटन को महत्त्व मिले, तो कई नए डेस्टिनेशन उभर सकते हैं। हिमाचल में पर्यटन विकास को होटलों से अलग मनोरंजन पार्कों, साइंस सिटी, प्राकृतिक नजारों और जल संसाधनों के इर्द-गिर्द समृद्ध करना होगा। जिस दिन हिमाचल अपने सीमांत क्षेत्रों को भी पर्यटन आकर्षणों में सम्मिलित कर पाया, उस दिन से हाई एंड पर्यटन का श्रीगणेश हर स्थान पर हो जाएगा।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App