पाक नहीं, चीन हमारी सबसे बड़ी चुनौती, नरवणे बोले, शांति चाहते हैं, तो फौज को युद्ध के लिए तैयार रहना होगा

By: Aug 21st, 2026 11:02 pm

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नया और दूरदर्शी आंकलन किया है। श्री नरवणे ने कहा कि आतंकवाद के लगातार खतरे के कारण भारत का ध्यान काफी हद तक पाकिस्तान पर केंद्रित रहा है, लेकिन दीर्घकाल में चीन कई क्षेत्रों में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है। चीन के संदर्भ में शत्रु शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हुए नरवणे ने कहा कि भारत को बीजिंग के साथ लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने के साथ-साथ मजबूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान और चीन, दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं और दोनों के साथ सीमाओं का विवाद अभी अनसुलझा है।

उन्होंने कहा कि हालांकि, दोनों देश अलग-अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन पूरी तरह से अलग हैं। हमने दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं। हमारी सीमाएं को लेकर विवाद अनसुलझे हैं। इसलिए वे हमेशा खतरे और चुनौती के रूप में हमारे राडार पर रहेंगे। अगर हम शांति चाहते हैं, तो फौज को युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। पाकिस्तान से तत्काल खतरा मुख्य रूप से आतंकवाद के लगातार बने रहने के कारण है, जबकि आने वाले वर्षों में चीन के भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने की संभावना है। उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ बड़े युद्ध लड़े हैं।

पड़ोसी देशों की अशांति पर किया अलर्ट

श्री नरवणे ने भारत के व्यापक पड़ोस को भी सुरक्षा के नजरिए से महत्त्वपूर्ण बताया और नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश अपने पड़ोसी नहीं चुन सकता, इसलिए उपलब्ध परिस्थितियों के साथ बेहतर तरीके से काम करना पड़ता है। इसी बीच उन्होंने पड़ोसी देशों की अशांति पर भी अलर्ट किया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में अस्थिरता से शरणार्थियों का दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा तस्करी, मादक पदार्थों और अवैध हथियारों की आवाजाही जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

वार्ता पहली प्राथमिकता

श्री नरवणे ने कहा कि चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और सैन्य मामलों सहित कई क्षेत्रों में भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत को ताकत का इस्तेमाल करने के बजाय बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से चीन के साथ मतभेद सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बल प्रयोग का सहारा लेना हमेशा आखिरी प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत को किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने के लिए विश्वसनीय सैन्य तैयारी बनाए रखनी चाहिए।


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