78 साल से देश के आलू की किस्मत बदल रहा सीपीआरआई

By: Aug 21st, 2026 12:51 am

स्थापना दिवस पर किसानों और कर्मचारियों का सम्मान, आधुनिक बीज तकनीक को बताया बड़ी उपलब्धि

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), शिमला का 78वां स्थापना दिवस शुक्रवार को संस्थान के सभागार में उत्साह के साथ मनाया गया। समारोह में शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कुमार कश्यप मुख्य अतिथि और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, किसानों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सीपीआरआई की 78 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और विस्तार गतिविधियों के माध्यम से संस्थान ने देश में आलू की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के साथ किसानों को उन्नत तकनीकों से जोडऩे में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि सीपीआरआई ने करीब आठ दशक की यात्रा में आलू अनुसंधान और उत्पादन को नई दिशा दी है। संस्थान की तकनीकों से विभिन्न आलू उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिला है और उत्पादन, गुणवत्ता तथा आय में सुधार हुआ है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और स्वस्थ बीज को आलू उत्पादन की आधारशिला बताया। समारोह में उत्कृष्ट कार्य के लिए वैज्ञानिक वर्ग में डॉ. दलामु, तकनीकी वर्ग में नीम चंद, प्रशासनिक वर्ग में ओम प्रकाश और कुशल सहायक वर्ग में पदम चंद को सम्मानित किया गया। प्रगतिशील किसानों आशा देवी, रीना देवी, लायक राम, जोगेंद्र और हीरा सिंह को भी सम्मान मिला। मुख्य अतिथि ने किसानों को कृषि उपकरण वितरित किए। कार्यक्रम में फागली स्कूल के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण और कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने किसानों से सरकार की किसानोन्मुखी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों, कृषि विभागों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल से ही कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।


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