पीरनिगाह में हर तरफ चीख-ओ-पुकार

By: Aug 26th, 2026 12:01 am

बार-बार हो रहे हादसों से कोई नहीं ले रहा सबक ,मालवाहकों में सफर से खतरे में जानें, दो सप्ताह में चार हादसे

नगर संवाददाता-ऊना
धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान मालवाहक वाहनों में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को बैठाकर ले जाने का सिलसिला ऊना में लगातार हादसों का कारण बन रहा है। पिछले दो सप्ताह में श्रद्धालुओं के मालवाहक वाहनों से जुड़े चार हादसे सामने आ चुके हैं। इनमें कई श्रद्धालु घायल हुए, जबकि दिलवां में श्रद्धालुओं के वाहन की चपेट में आने से अंब क्षेत्र के दो युवकों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद ऐसे वाहनों में श्रद्धालुओं का सफर थम नहीं रहा है। मंगलवार को पीर निगाह मंदिर से माथा टेककर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरा मालवाहक ट्रक मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर तीखी उतराई में चालक के नियंत्रण से बाहर होकर गहरी खाई में जा गिरा। उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीर निगाह में माथा टेकने के बाद वापस लौट रहे हरियाणा के श्रद्धालुओं से भरा ट्रक हादसे का शिकार हो गया।

पीर निगाह मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर उतराई में चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और वाहन सडक़ किनारे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में करीब 52 श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें 13 श्रद्धालुओं के सिर में चोटें आई है। घायलों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। घायलों की चीखो-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। गनीमत रही कि हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। दिलवां में श्रद्धालुओं के वाहन की चपेट में आने से अंब क्षेत्र के दो युवाओं की मौत हो गई थी। इसके बाद पीर निगाह की तीखी उतराई पर श्रद्धालुओं से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रालियां पलट चुकी हैं, जिनमें कई श्रद्धालु घायल हुए थे। पीर निगाह क्षेत्र में ही श्रद्धालुओं के दो संशोधित रेहड़ी नुमा मोटरसाइकिल गहरी खाई में गिरने की घटनाएं भी सामने आईं। अब मालवाहक वाहनों में सफर की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालु ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राली, टैंपो और जीप समेत मालवाहक वाहनों में डबल डेकर बनाकर सफर कर रहे हैं। यह खतरे से खानी नहीं।

सीमा पर रोकने के दावे, फिर भी एंट्री
प्रशासन और पुलिस की ओर से धार्मिक मेलों से पहले दूसरे राज्यों से के मालवाहक वाहनों को सीमाओं पर रोकने की बात कही जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एचआरटीसी बसों की व्यवस्था भी की जाती है। इसके बावजूद मालवाहक वाहन ऊना तक पहुंच रहे हैं। हादसा होने के बाद कुछ समय के लिए सख्ती बढ़ती है, लेकिन हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डालकर मालवाहक वाहनों में होने वाला यह ‘मौत का सफर’ कब रुकेगा?

न जनता सबक ले रही, न ही पुलिस बरत रही सख्ती
मालवाहकों में सफर करते समय कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन न तो जनता सबक लेती है और न ही पुलिस प्रशासन सख्ती बरत रहा है। पुलिस भी चालान काटकर अपना फर्ज निभा लेती है। जब कोई बड़ा हादसा होता है तो जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों द्वारा काफी सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन उसके कुछ दिन बाद फिर से वहीं हालात हो जाते है।

क्या बोले ऊना के पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमथ
एसपी ऊना सचिन हिरेमथ ने कहा कि जिला की सीमाओं पर पुलिस पूरी मुस्तैदी से तैनात है। वैकल्पिक मार्गों से धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले ऐसे वाहनों को रोकने के लिए भी उचित कदम उठाए जाएंगे।


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