दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र पढ़ाएंगे गिरिपार के डा. काकू राम ठाकुर
वैसे तो जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की माटी से बहुत से लाल बड़े-बड़े ओहदों पर बैठे हुए है। चाहे प्रशासनिक क्षेत्र हो या खेलकूद हर क्षेत्र में क्षेत्र की प्रतिभाएं अपनी काबिलीयत के बूते देश-प्रदेश के विकास में भूमिका निभा रही है। मगर इस बार ग्रामीण अंचल से जो शख्सियत दिल्ली विश्वविद्यालय तक निकली है, उसकी संघर्ष की कहानी अनोखी और प्रभावित करने वाली है। हम बात कर रहे हैं नागरिक उपमंडल कफोटा के दुर्गम गांव कोटा पाब के डा. काकू राम ठाकुर की, जो गांव से खेतों से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तक पहुंचे हैं। ये संघर्ष इसलिए अनोखा है, क्योंकि जिस दुर्गम ग्रामीण क्षेत्र से डा. काकू राम ठाकुर आते हैं, वहां आज भी मूलभूत सुविधाएं निरंतर नहीं रहती। लाइट जाती है, तो घंटो नहीं आती। सडक़ बंद होती है, तो बहाल होने में महीनों लग जाते हैं। शहरों जैसी लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं की तो बात ही मत कीजिए। सुविधाओं के अभाव के बीच डा. ठाकुर ने बता दिया कि यदि मन में सच्ची लगन हो, संघर्ष सच्चा हो और सपने हासिल करने की मेहनत सच्ची हो, तो कोई मुश्किल उसे रोक नहीं सकती। डा. काकू राम ठाकुर ने बचपन में खेतों में काम किया। उनके परिवार ने पहाड़ों में खेतीबाड़ी और बकरियां पालकर जीवन चलाया।
डा. ठाकुर ने पढ़ाई के साथ कभी सिलेंडर ढोए, कभी दिहाड़ी मजदूरी की, लेकिन अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और आज दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिक शास्त्र के असिसटेंट प्रोफेसर के पद तक पहुंच गए। गिरिपार क्षेत्र के कोटा पाब में जन्मे काकू राम ठाकुर ने 10वीं कोटा पाब के सरकारी स्कूल से उत्तीर्ण की। 12वीं बकरास स्कूल से तथा स्नातक की शिक्षा सोलन से पास की। राजनीति शास्त्र में आगे की पढ़ाई और शोध हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से की। नेट में छह बार सफलता, जेआरएफ और एसआरएफ उत्तीर्ण की। इसके साथ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पीएचडी करने के उपरांत अब दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कालेज (सायंकालीन) में राजनिति शास्त्र में एसिसटेंट प्रोफेसर बन गए हैं। जिस गांव से निकलकर बड़े शहर तक पढ़ाई करने जाना भी किसी सपने जैसा लगता है, उसी कोटा पाब का बेटा आज दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को राजनिति शास्त्र पढ़ाएगा। इतना बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद भी काकू राम अपनी मिट्टी, अपने माता-पिता और अपने गांव को नहीं भूले। आज भी गांव आते हैं, तो खेतों में हाथ बंटाते हैं, माता-पिता के साथ खड़े होते हैं और युवाओं को आगे बढऩे के लिए प्रेरित करते हैं।
Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also, Download our Android App or iOS App
