बीबीएन में लंपी वायरस के खात्मे को कसी कमर

By: Aug 26th, 2026 12:01 am

पशुपालन विभाग अलर्ट; 20 हजार गोवंश में से 7500 का टीकाकरण, घर-द्वार पहुंच रहीं विभाग की टीमें

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-नालागढ़
औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ बीबीएन में करीब 20 गोवंश में लंपी वायरस जैसे लक्षण सामने आने के बाद पशुपालन विभाग अलर्ट हो गया है। बीमारी के संभावित प्रसार को रोकने के लिए विभाग ने टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। विभागीय टीमें घर-द्वार पहुंचकर गोवंश का टीकाकरण कर रही हैं। बीबीएन क्षेत्र में करीब 20 हजार गोवंश हैं, जिनमें से अब तक लगभग 7500 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी नालागढ़ डाक्टर संजीव त्यागी ने बताया कि फिलहाल करीब 20 गोवंश में लंपी जैसे लक्षण देखने को मिले हैं। विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और पशुपालकों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गोवंश को प्रभावित करती है। यह बीमारी मक्खी मच्छर और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु तक फैल सकती है। संक्रमित पशुओं की आवाजाही से भी बीमारी दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच सकती है।

डाक्टर संजीव त्यागी ने पशुपालकों से अपील की कि जिन पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई दें, उन्हें तुरंत दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाए। ऐसे पशुओं के लिए चारा और पानी की व्यवस्था भी अलग से की जाए। पशुशालाओं में नियमित सफाई रखी जाए और आसपास पानी जमा न होने दिया जाए । उन्होंने कहा कि पशुओं को मक्खीए मच्छर और किलनी से बचाने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार उचित उपाय किए जाएं। डाक्टर त्यागी ने कहा कि पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है। किसी भी पशु में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसकी जानकारी तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय को दें ताकि समय पर उपचार और रोकथाम के उपाय किए जा सकें। उन्होंने पशुपालकों से विभाग के घर.द्वार टीकाकरण अभियान में सहयोग करने की भी अपील की

ये-ये मुख्य लक्षण

बीमारी से प्रभावित पशु में बुखार, शरीर पर गांठें या उभार, आंख और नाक से पानी आना, भूख कम होना सुस्तीए पैरों या शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर पशुपालकों को तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है। ताकि समय पर उपचार और रोकथाम के उपाय किए जा सकें।


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