तलाक के बाद भी पत्नी का भरण पोषण पति का कानूनी दायित्व, प्रदेश उच्च न्यायालय ने खारिज की पति की याचिका
विधि संवाददाता-शिमला
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पारिवारिक कानून और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला का विवाह तलाक के जरिए समाप्त भी हो चुका हो, तब भी जब तक वह दूसरी शादी नहीं कर लेती, तब तक पूर्व पति उसे भरण-पोषण देने के अपने वैधानिक दायित्व से बच नहीं सकता। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने हमीरपुर की फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति सुरजीत द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। केस के अनुसार याचिकाकर्ता सुरजीत और प्रतिवादी सावित्री देवी का विवाह 21 दिसंबर, 1997 को हुआ था।
वैवाहिक जीवन में प्रताडऩा और क्रूरता के कारण सावित्री देवी को वर्ष 2009 में घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद उन्होंने फैमिली कोर्ट हमीरपुर में तलाक और धारा 125 के तहत गुजारे भत्ते की याचिका दायर की। 22 नवंबर, 2021 को क्रूरता के आधार पर उनके तलाक की डिक्री मंजूर हो गई। इसके बाद, 23 जनवरी, 2024 को फैमिली कोर्ट ने पति को आदेश दिया कि वह सावित्री देवी को याचिका दायर करने की तिथि (18 मई, 2019) से 4,000 प्रति माह भरण-पोषण राशि का भुगतान करे। पति ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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