चांद से टकराया स्पेसएक्स का 4000 किलो वजनी रॉकेट, आइंस्टीन क्रेटर के पास हुई टक्कर, धरती को खतरा नहीं
आइंस्टीन क्रेटर के पास हुई टक्कर; दूरबीन से भी देखना मुश्किल, नासा ने कहा, धरती को खतरा नहीं
एजेंसियां — न्यूयार्क
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का एक बेकाबू रॉकेट बुधवार को चांद की सतह से टकरा गया। चार हजार किलो वजनी और करीब पांच मंजिला इमारत जितना बड़ा यह रॉकेट करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चंाद की सतह से टकराया। यह टक्कर चांद के आइंस्टीन क्रेटर के पास हुई। यह क्षेत्र चांद के उस हिस्से में है, जहां दिन का उजाला रहता है और जो पृथ्वी से दिखाई देता है। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे आम टेलिस्कोप से देखना नामुमकिन था, क्योंकि टक्कर के वक्त बनी रोशनी बेहद हल्की थी। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविद डा. मैट बोथवेल का कहना है कि टक्कर के कारण चांद की धूल का एक बड़ा गुबार उठा होगा, जो 100 किलोमीटर तक ऊपर गया होगा और कई मिनटों तक रहा होगा। नासा ने कहा कि इस टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। हालांकि इस टक्कर की पुष्टि तस्वीरों के आने के बाद होगी।
बता दें कि यह बेकाबू टुकड़ा स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा था। इसे जनवरी 2025 में फ्लोरिडा से अमरीका और जापान के दो लूनर लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के लिए लांच किया गया था। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में तैरता रह गया। पिछले 18 महीनों के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से इसका रास्ता धीरे-धीरे बदल गया। खगोलविदों ने डाटा का अध्ययन करके पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यह रॉकेट भटककर सीधे चांद की ओर जा रहा है और उससे टकराएगा।
टक्कर की तस्वीरों के लिए इंतजार करना होगा
फिलहाल जब यह हादसा हुआ, तब चांद का चक्कर लगा रहा कोई भी स्पेसक्राफ्ट सही पोजिशन में नहीं था, इसलिए लाइव तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं। दक्षिण कोरिया का दानुरी ऑर्बिटर और नासा का लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर आने वाले दिनों में टक्कर वाली जगह के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके चांद की सतह पर बने नए निशान की पहचान करेंगे।
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