बंद होने के बाद खंडहर बन गया खटवीं स्कूल का भवन
सैकड़ों छात्रों का भविष्य संवारने वाला स्कूल अब तलाश रहा खुद का वजूद, छात्रों की कम संख्या के चलते बंद कर दिया था खटवीं स्कूल
निजी संवाददाता – गलोड़
जिस स्कूल ने हजारों छात्रों का भविष्य संवारा है आज वह बदहाली में अपने वजूद की जंग लड़ रहा है। छात्रों की कम हुई संख्या के बाद से बंद हुआ राजकीय प्राथमिक स्कूल खटवीं आज उस स्थिति में है जिसके बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा। खंडहर में तब्दील होता स्कूल भवन न जाने कब इतिहास के पन्नों में भूतकाल की कहानी बन जाए। इसके अंदर पूर्व में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को भी शिफ्ट कर दिया गया है। लगभग 46 वर्षों के दौरान हजारों बच्चों ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इसी स्कूल से पूरी की है।
वाक्य ग्राम पंचायत धनेड़ के अंतर्गत पडऩे वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला खटवीं का है। वर्ष 1980 से 2023 तक हजारों भविष्य को तराशाती यह पांच कमरों की इमारत आज अपने वजूद की जंग लडऩे का मजबूत है। चार दशक से ज्यादा तक भविष्य संवारने वाले इस भवन का कसूर यह था कि सरकार द्वारा तय सं या से कम नौनिहाल यहां रह गए। अंतत: 31 मार्च, 2023 को पाठशाला को बंद कर दिया गया, जिससे खटवीं, लिंगवी और खटवीं धार की यह प्राथमिक पाठशाला बंद हो गई। आज इस पाठशाला की इतनी दुर्दशा है कि इसके छत, बरामदा, दरवाजे जर्जर हो चुके हैं। परिसर के आसपास झाडियां इस कदर उगी हैं कि अनुमान लगाना कठिन है कि कभी यहां पाठशाला थी। भवन के बंद होने के बाद ऐसे प्रतीत हो रहा है कि इसके बंद हो जाने के बाद शायद ही किसी ने इसकी सुध ली हो। ग्राम पंचायत धनेड़ की प्रधान किरण शर्मा का कहना है कि स्थानीय पाठशाला के बंद होते ही पाठशाला में चल रही आंगनबाड़ी भी गांव में स्थानंतरित हो गई है। भवन पिछले तीन साल से बदहाल स्थिति में है। हालांकि मामला उनके प्रधान बनने से पहले का है।
ऑफिस का फोन आउट ऑफ आर्डर
जब इस बावत उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा हमीरपुर से बात करनी चाही, तो बार-बार उनके कार्यालय का लैंडलाइन आउट आफ आर्डर आया। उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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