मोदी सरकार के ई20 प्रेम ने बढ़ा दी महंगाई, महंगे खाने-महंगे सफर, दोनों की कीमत चुका रही जनता
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली
ई20 पेट्रोल पर छिड़ी बहस अब सिर्फ गाडिय़ों के इंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे सरकार की नीति और नीयत पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ई20 को लेकर आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति के कारण जनता को ‘महंगे खाने और महंगे सफर’ दोनों की कीमत चुकानी पड़ रही है। कांग्रेस नेता ने केंद्र की ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति की तत्काल समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग भी की है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ‘गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती।’ उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल उत्पादन में गन्ने और अनाज के इस्तेमाल के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है।
करीब 25 लाख टन चीनी-लायक गन्ना इथेनॉल उत्पादन में चला गया, जिसके परिणामस्वरूप पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत 48 रुपए से बढक़र 70 रुपए प्रति किलोग्राम और गुड़ की कीमत 50 रुपए से बढक़र 65 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। उन्होंने दावा किया कि चावल और मक्के का आटा भी क्रमश: 16 प्रतिशत और 11 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि पशु आहार की कीमत में 10.34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कांग्रेस महासचिव ने ई20 के कारण वाहनों के माइलेज और उनकी अनुकूलता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो वाहन 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लिए तैयार नहीं हैं, उनमें खराबी का जोखिम हो सकता है और बिना समुचित परीक्षण के वाहनों में माइलेज कम होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि ई20 नीति की तत्काल समीक्षा होनी चाहिए और जनता को बिना इथेनॉल वाले विकल्प मिलने चाहिए। गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती।
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