Himachal News: कमाई का 86% वेतन-भत्तों और कर्ज चुकाने पर खर्च, कैग रिपोर्ट में खुलासा

By: Sep 4th, 2026 12:01 am

कैग रिपोर्ट में खुलासा; 24,100 करोड़ लोन लिया, 18,091 करोड़ चुकाया, कर्ज 1.02 लाख करोड़ पार

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — शिमला

हिमाचल प्रदेश की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग ने गंभीर चिंता जताई है। वर्ष 2024-25 की वित्त लेखा परीक्षा रिपोर्ट में राज्य पर बढ़ते कर्ज, प्रतिबद्ध व्यय और कमजोर राजस्व वृद्धि को वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बताया है। कैग की रिपोर्ट विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में रखी। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ट्रेजरी का डेली कैश बैलेंस 365 दिनों में से सिर्फ 203 दिन ही बना पाई। 162 दिन ट्रेजरी में कैश बैलेंस नहीं था। पूरे साल में 42 बार ट्रेजरी ओवरड्राफ्ट में गई और इस अवधि में कैश बैलेंस इनवेस्टमेंट भी जीरो रही। वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल कर्ज करीब 1,02,187.62 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का करीब 44 फीसदी है। राज्य की आंतरिक देनदारियां 31 मार्च, 2025 तक 67,448.38 करोड़ रुपए हो गईं, जिनमें एक साल में 9.78 फीसदी की वृद्धि हुई। कैग के अनुसार वर्ष 2024-25 में हिमाचल का राजकोषीय घाटा 12,611.05 करोड़ रहा, जो सकल घरेलू उत्पाद का 5.44 फीसदी है। यह हिमाचल प्रदेश एफआरबीएम अधिनियम में निर्धारित तीन फीसदी की सीमा से काफी अधिक है।

राजस्व घाटा भी 6,804.61 करोड़ रुपए यानी जीएसडीपी का 2.94 फीसदी रहा। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 24,100 करोड़ का आंतरिक कर्ज उठाया, जबकि 18,091 करोड़ का पुराना कर्ज चुकाया। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियां 40,872.35 करोड़ रुपए रहीं, जबकि राजस्व व्यय 47,676.96 करोड़ रुपए रहा। ब्याज भुगतान पर ही 6,260.93 करोड़ रुपए खर्च हुए, जबकि पूंजीगत व्यय 5,956.83 करोड़ रुपए रहा। सबसे बड़ी चिंता वेतन, पेंशन और ब्याज के रूप में होने वाले प्रतिबद्ध खर्च को लेकर है। इन तीन मदों पर कुल 33,266 करोड़ रुपए खर्च हुएए जो राजस्व प्राप्तियों का करीब 86 फीसदी है। इसका नतीजा यह रहा कि विकास कार्यों के लिए राजस्व का केवल 14 फीसदी हिस्सा ही बचा। राज्य सरकार अपने बजट अनुमानों का केवल 84.57 फीसदी ही हासिल कर पाई। इसमें 2,328.68 करोड़ की कमी रही। राज्य के कुल राजस्व में एसजीएसटी, राज्य आबकारी शुल्क और बिक्री कर जैसे तीन प्रमुख कर स्रोतों की हिस्सेदारी 81 फीसदी है। कैग के मुताबिक राज्य का ग्रोथ रेट 9.2 फीसदी होने के बावजूद यह रेवेन्यू जेनरेशन में कन्वर्ट नहीं हुआ। रिपोर्ट कहती है कि रेवेन्यू अकाउंट की कुल खर्च में से 86 फीसदी प्रतिबद्ध देनदारी यानी सैलरी, पेंशन और इंटेरेस्ट पेमेंट इत्यादि पर खर्च हो गया, जबकि जनकल्याण के लिए सिर्फ 14 फीसदी बचा।

पेंशन खर्च में 45 फीसदी वृद्धि

कैग ने पेंशन खर्च में तेजी से हुई वृद्धि को चिंताजनक बताया है। वर्ष 2022-23 में पेंशन व्यय 45 फीसदी बढक़र 6,399 करोड़ से 9,284 करोड़ रुपए हो गया। बिजली, परिवहन तथा खाद्य एवं आपूर्ति सहित विभिन्न क्षेत्रों में सबसिडी पर 1,872 करोड़ रुपए खर्च किए गएए जो कुल राजस्व व्यय का चार फीसदी है। पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग यानी राज्य के बोर्ड निगमों में लगाए गए 6239 करोड़ से सिर्फ 191 करोड़ का रिटर्न आया।


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