सब मुर्दे हैं यहां…ताला लगा दो इस मेडिकल कॉलेज में, बच्ची की मृत्यु के बाद छलका बेबस पिता का दर्द

By: Sep 7th, 2026 5:45 pm

चंबा। एक बेबस पिता क्या करता, गोद में उसकी डेढ़ साल की मासूम बच्ची अगर दम तोड़ दे, तो पिता का दर्द छलकेगा ही। यह दर्द सिर्फ एक पिता का नहीं, एक मां का नहीं, एक भाई-बहन का नहीं, बल्कि हिमाचल के हजारों लोगों का है, जिनके अपने सही वक्त पर ईलाज न मिलने के कारण अकाल मृत्यु का शिकार हो गए। चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और लापरवाही की हद अब सिर से ऊपर जा चुकी है। क्या हिमाचल में ऐसे ही मासूम जिंदगियां खत्म होती रहेंगी। क्या लापरवाही की हदें यूं ही पार होती रहेंगी। क्या हर पिता ऐसे ही अपने जिगर के टुकड़ों की आहुती देता रहेगा। यह एक छोटी सी बात नहीं…एक मां ने अपनी लाड़ली खोई है…एक पिता ने अपने जिगर के टुकड़े को आंखों के सामने मौत के आगोश में जाते देखा है।

जानकारी के अनुसार मेडिकल कालेज चंबा में रविवार को डेढ़ वर्षीय बच्ची की सही वक्त पर उपचार न मिलने पर मौत हो गई। चुराह की ग्राम पंचायत सेईकोठी के गांव नरवाड़ निवासी कुलदीप सिंह ने बताया कि उनकी डेढ़ वर्षीय बेटी कृतिका की छाती जाम थी और उसमें खून की कमी के लक्षण थे। उन्होंने सोचा कि नागरिक अस्पताल तीसा के बजाय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल चंबा में बच्ची को बेहतर और त्वरित उपचार मिल सकेगा। इसके चलते वह रविवार को शाम करीब चार बजे बच्ची को लेकर मेडिकल कालेज पहुंचे, लेकिन बच्ची को तुरंत दाखिल नहीं किया गया। शाम करीब साढ़े 5 बजे बच्ची को एडमिट किया गया। पिता का आरोप है कि दाखिल करने के बाद उन्हें एक्स-रे करवाने के लिए भेजा गया, लेकिन वहां कोई भी स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं मिला। इसके उपरांत दो अन्य टैस्ट करवाने के लिए कह दिया, जिसके लिए उन्हें बाहर निजी लैब के चक्कर काटने पड़े। निजी लैब से टैस्ट करवाकर जब वह वापस लौटे तो स्टाफ ने कहा कि बच्ची को भाप देनी पड़ेगी और इंजेक्शन लगेगा। उन्होंने कहा कि आपातकालीन कक्ष पूरी तरह से इंटर्न डाक्टरों के हवाले छोड़ा गया था और कोई भी विशेषज्ञ या वरिष्ठ डाक्टर वहां नहीं था। बच्ची करीब पौने घंटे तक तड़पती रही, लेकिन कोई डाक्टर देखने तक नहीं आया। बच्ची के दम तोडऩे से महज 15 मिनट पहले एक डाक्टर देखने पहुंचे। इस दौरान बच्ची को इंजेक्शन लगाया और भाप दी, उसके तुरंत बाद बच्ची पूरी तरह अचेत हो गई और उसने दम तोड़ दिया। अब सवाल उठ रहा है कि ईलाज में लापरवाही से मौत के कितने मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन सबक सीख कर सुधार करने को तैयार नहीं है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने के बजाय लीपापोती वाला रवैया अपनाया जा रहा है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और लापरवाही कीमत अब प्रदेश के लोगों को चुकानी पड़ रही है।


Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also,  Download our Android App or iOS App