ईरान की बड़ी चेतावनी, अमरीका-इजरायल ने दोबारा हमला किया तो हिंद महासागर तक फैल सकता है युद्ध

By: Sep 24th, 2026 6:23 pm

तेहरान। ईरान ने चेतावनी दी है कि अमरीका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किए जाने पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का दायरा हिंद महासागर तक फैल सकता है। फारस की खाड़ी और लाल सागर में बढ़े तनाव के बीच ईरान ने कहा है कि उसके सशस्त्र बल विभिन्न संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने कहा कि ईरानी बलों ने देश की सैन्य सुविधाओं या राष्ट्रीय हितों पर संभावित हमले समेत विभिन्न परिस्थितियों के लिए तैयारी की है।

ईरान की समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, सफवी ने कहा, “हम नहीं जानते कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मन में क्या चल रहा है।”उन्होंने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल सबसे खराब परिस्थितियों के लिए हमेशा तैयार हैं और किसी भी नए तनाव से संघर्ष का भौगोलिक दायरा काफी बढ़ सकता है। सफवी ने कहा, “अब जबकि युद्ध खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से लाल सागर तक फैल चुका है, यह संभव है कि अमेरिका के साथ संभावित युद्ध के अगले चरण में यह मोर्चा और आगे बढ़कर हिंद महासागर या किसी अन्य क्षेत्र तक पहुंच जाए।”

उनकी यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब संघर्ष तत्काल खाड़ी क्षेत्र से आगे बढ़कर लाल सागर और रणनीतिक बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास भी तनाव बढ़ा रहा है। यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। यमन में सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों से लड़ रहे हूती विद्रोहियों ने हाल में लाल सागर के तट के कुछ हिस्सों पर अपना नियंत्रण मजबूत किया है, जिससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग पर दबाव बढ़ा है। ईरान ने भी फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए पश्चिम एशिया युद्ध के मौजूदा चरण के दौरान अपने दक्षिणी तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात प्रतिबंधित किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक है और इसके रास्ते वैश्विक तेल तथा गैस की बड़ी मात्रा का परिवहन होता है। इस जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। सफवी की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि ईरान पर दोबारा हमला होने की स्थिति में वह संघर्ष का दायरा खाड़ी और लाल सागर से आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान किस तरह की सैन्य कार्रवाई कर सकता है या हिंद महासागर में किसी विशेष लक्ष्य को निशाना बनाने की बात कही।

इस बीच ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान को “आतंकवाद का नंबर एक प्रायोजक” बताया और अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा ईरान को लेकर अमेरिकी नीति पर केंद्रित किया। उन्होंने महासभा की वार्षिक आम बहस में मौजूद विश्व नेताओं से कहा कि पिछले 51 वर्षों से “कट्टरपंथी ईरानी शासन” ने पूरे पश्चिम एशिया और उसके बाहर “कत्लेआम और अराजकता” फैलाई है। ट्रंप ने कहा, “मैं ईरान को परमाणु हथियार रखने की कभी अनुमति नहीं दूंगा।”उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद के समर्थन को समाप्त करने के बदले आर्थिक सहयोग की पेशकश की थी, लेकिन ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।


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