न पेटियों के ढेर, न गाडिय़ों की कतारें….फीका पड़ा सेब सीजन

By: Sep 3rd, 2026 12:02 am

कम उत्पादन से बागबानों की कमाई घटी, कामगारों को भी पहले जैसा रोजगार नहीं

कार्यालय संवाददाता-पतलीकूहल
सितंबर महीने का आगाज होते ही जहां पिछले वर्षों में कुल्लू घाटी की फल एवं सब्जी मंडियां सेब की पेटियों से गुलजार रहती थीं, वहीं इस बार सीजन के शुरुआती दौर से ही मंडियों की रौनक फीकी नजर आ रही है। सेब का उत्पादन कम होने के साथ-साथ बागवानों की कमाई भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर मंडियों में होने वाले कारोबार और बागवानों के साथ काम करने वाले कामगारों पर भी पड़ा है। सितंबर का महीना कुल्लू घाटी में सेब सीजन का सबसे व्यस्त दौर माना जाता रहा है।

इस दौरान घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सेब मंडियों तक पहुंचता था। मंडियों में सुबह से ही वाहनों की कतारें, सेब की पेटियों की आवाजाही और खरीददारों की चहल.पहल देखने को मिलती थी। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। सीजन के आगाज से ही बाजार में वह रौनक दिखाई नहीं दे रही, जिसके लिए कुल्लू की मंडियां जानी जाती हैं। बागवानों का कहना है कि इस वर्ष प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्रों में सेब की फसल पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम रही। जिन बागवानों के बगीचों में पहले सैकड़ों पेटियां तैयार होती थींए इस बार वहां उत्पादन काफी घट गया। उत्पादन कम होने के कारण बागवानों की कुल आमदनी पर भी असर पड़ा है। हालांकि कुछ समय के लिए अच्छी गुणवत्ता के सेब को बेहतर दाम मिले, लेकिन कम उत्पादन के कारण बागवानों को कुल कमाई में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाई।

तुड़ान से पैकिंग तक कामगारों के रोजगार पर पड़ा असर

सेब सीजन की मंदी का असर स्थानीय और बाहरी कामगारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बंपर फसल के दौरान बागवानों को तुड़ान, छंटाईए पैकिंग और ढुलाई के लिए बड़ी संख्या में कामगारों की जरूरत पड़ती थी। इससे हजारों कामगारों को कई सप्ताह तक लगातार रोजगार मिलता था। इस बार फसल कम होने के कारण काम के दिन भी कम हुए हैं। कई कामगारों को पहले की तुलना में कम समय के लिए काम मिल रहा है। मंडी में भी इसका असर नजर आ रहा है। कम मात्रा में सेब पहुंचने के कारण आढ़ती, खरीददार, पैकिंग से जुड़े मजदूर, वाहन चालक और अन्य कारोबारियों की गतिविधियां सीमित हो गई हैं। सेब कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों का कहना है कि इस वर्ष सीजन का वह उत्साह दिखाई नहीं दे रहा, जो सामान्य तौर पर सितंबर में चरम पर रहता था। बागवानों के लिए सितंबर का महीना सबसे अधिक व्यस्त होने के साथ-साथ उम्मीदों का भी महीना होता था। बगीचों में फसल तैयार होने के बाद बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती थी।

खरीददारों की भीड़ कम, कमाई भी लग गया ब्रेक

जिन मंडियों में इस समय तक सेब की पेटियों के अंबार और खरीदारों की भीड़ नजर आती थी, वहां इस बार अपेक्षाकृत सन्नाटा दिखाई दे रहा है। कम उत्पादन ने बागबानों की कमाई ही नहीं, बल्कि पूरे सेब कारोबार से जुड़े वर्गों की रफ्तार भी धीमी कर दी है।


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