घुमारवीं में पंडित दीनदयाल उपाध्याय को नमन
जयंती पर वैचारिक गोष्ठी, कार्यक्रम में सेवानिवृत्त उप निदेशक अमर सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि रहे
स्टाफ रिपोर्टर-घुमारवीं
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना समिति की बिलासपुर इकाई की ओर से सोमवार को प्रांचल पैलेस पट्टा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर वैचारिक गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त उप निदेशक अमर सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि रहे। अध्यक्षता समिति के प्रांत कार्यकारिणी के मार्गदर्शक गणेश दत्त शर्मा ने की। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपुरुषों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। समिति के पूर्व प्रांताध्यक्ष डॉ. देवराज शर्मा और जिला कार्यकारिणी सदस्य जगवीर सिंह की दिवंगत पत्नी को श्रद्धांजलि दी गई। उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।
समिति के संस्थापक एवं प्रांतीय मार्गदर्शक इंद्र सिंह डोगरा ने इतिहास संकलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता समिति के हिमाचल प्रांत के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन-दर्शन, एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए अंत्योदय का विचार आज भी प्रासंगिक है। गोष्ठी में भाखड़ा बांध और पारंपरिक घराट पद्धति पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। प्रो. पंकज ने भाखड़ा बांध के ऐतिहासिक, सामाजिक और विकासात्मक पक्षों पर शोध.पत्र प्रस्तुत किया। प्रो. सुरेश शर्मा ने लोक संस्कृति, जल संसाधनों और तकनीकी विरासत से जुड़ी पारंपरिक घराट पद्धति की जानकारी दी। मुख्य अतिथि अमर सिंह ठाकुर ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था के इतिहास पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुगल और ब्रिटिश काल में भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा। उन्होंने नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि औपनिवेशिक दौर में लॉर्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था लागू की गई।
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