ग्राहक को नया फोन या एक लाख 20 हज़ार दे कंपनी
22 हजार बीमा राशि सहित 32 हज़ार हर्जाना भी ठोंका, कंपनी को आईफोन ठीक करने के आदेश
स्टाफ रिपोर्टर – धर्मशाला
जिला उपभोक्ता विवाद आयोग कांगड़ा स्थित धर्मशाला ने मोबाइल फोन के बीमा दावे को खारिज करने के मामले में उपभोक्ता के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को मोबाइल फोन को उपभोक्ता के घर से लेकर 30 दिन के भीतर ठीक कर संतुष्टि के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर कंपनी को फोन बदलना होगा या 1.20 लाख रुपए की पूरी राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटानी होगी। साथ ही बीमा कंपनी को 21 हज़ार 900 रुपए का बीमा प्रीमियम भी वापस करना होगा। आयोग ने ऑनसाइटगो को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए दस हजार रुपए तथा मोबाइल विक्रेता को 7500 रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। दोनों को 15 हजार रुपए मुकदमा खर्च भी संयुक्त रूप से देना होगा। विक्रेता के खिलाफ मामला एकतरफा चला था। उक्त फैसला आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने सुनाया। मामले के अनुसार कांगड़ा निवासी दीपक शर्मा ने 17 जनवरी 2024 को 1.20 लाख रुपए में मोबाइल फोन खरीदा था।
उसी दिन उन्होंने ऑनसाइटगो की दो वर्ष की आईप्रोटेक्ट योजना के लिए 21 हज़ार 900 रुपए का प्रीमियम दिया। 28 दिसंबर 2024 को फोन दुर्घटनावश क्षतिग्रस्त हो गया। शिकायतकर्ता ने सात जनवरी 2025 को सेवा अनुरोध दर्ज करवाकर आठ हज़ार 674 रुपए सेवा शुल्क भी जमा किया, लेकिन कंपनी ने 17 जनवरी को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि फोन को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया गया है। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि योजना में आकस्मिक क्षति के लिए सुरक्षा दी गई थी, और दस्तावेज में इसे ‘नो क्वेश्चन आस्क्ड’ मरम्मत नीति बताया गया था। आयोग ने कहा कि जब कंपनी ने ऐसी योजना के लिए प्रीमियम लिया है तो बाद में तकनीकी आधार पर वैध दावे को खारिज नहीं कर सकती। तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट पर हस्ताक्षर न होने और योग्य विशेषज्ञ का प्रमाण पेश नहीं किए जाने को भी आयोग ने महत्वपूर्ण माना। इसके आधार पर उक्त अहम फैसला आयोग की ओर से सुनाया गया है।
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