‘गोल्डन कारवां’ में खुला विरासत का सुनहरा राज

By: Sep 1st, 2026 12:02 am

नालंदा से कोणार्क तक दिखी भारत की कहानी, गेयटी में छात्रों ने मॉडलों में उतारा ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता का सफर

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
मोनाल पब्लिक स्कूल संजौली की ओर से सोमवार को गेयटी थियेटर में ‘गोल्डन कारवां ए जर्नी ऑफ आइडियाज, कल्चर एंड सिविलाइजेशंस’ विषय पर सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में भारत के प्राचीन व्यापारिक एवं सांस्कृतिक मार्गों, सभ्यताओं और ज्ञान परंपराओं को विद्यार्थियों ने विभिन्न मॉडल, कलाकृतियों, प्रस्तुतियों और अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से जीवंत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश होमगार्ड, सिविल डिफेंस एवं फायर सर्विसेज की महानिदेशक एवं कमांडेंट जनरल सतवंत अटवाल और हिमाचल प्रदेश कारागार एवं सुधार सेवाओं के पुलिस महानिदेशक अभिषेक त्रिवेदी की मौजूदगी में हुआ।

प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने प्राचीन सिल्क रूट और गोल्डन रूट को केवल व्यापार के मार्ग के रूप में नहीं, बल्कि विभिन्न सभ्यताओं के बीच विचारों, ज्ञान, कला और संस्कृति के आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी में नालंदा, तक्षशिला, कोणार्क, सोमनाथ और अंगकोरवाट जैसे ऐतिहासिक एवं ज्ञान के प्रमुख केंद्रों को मॉडल और प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया गया। इसके साथ ही गणित, आयुर्वेद, वास्तुकला, समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भारत के योगदान को भी विद्यार्थियों ने रोचक तरीके से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी के विभिन्न हिस्सों को तैयार करने के लिए शोध, डिजाइन और रचनात्मक कार्य किया। पुनर्चक्रित एवं दोबारा उपयोग की जाने वाली सामग्री से तैयार किए गए मॉडल प्रदर्शनी का खास आकर्षण रहे। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों ने इतिहास को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे रचनात्मक तरीके से समझने का प्रयास किया। कार्यक्रम के माध्यम से मोनाल पब्लिक स्कूल ने अपनी 43 वर्ष की शैक्षणिक यात्रा को भी याद किया। विद्यालय ने अपनी यात्रा के दौरान विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ चरित्र, जिज्ञासा, रचनात्मकता और संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर दिया।

कैंसर अस्पताल की मदद के लिए भी योगदान
गोल्डन कारवां को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ा गया। प्रदर्शनी में बिक्री केंद्र से प्राप्त होने वाली आय का एक हिस्सा कैंसर अस्पताल के सहयोग के लिए देने का निर्णय लिया गया। आयोजकों ने कहा कि ज्ञान और सफलता का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका लाभ समाज तक पहुंचे। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, शोध क्षमता, टीमवर्क और संचार कौशल की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम ने इतिहास, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को एक मंच पर लाकर विद्यार्थियों को अपनी विरासत समझने और भविष्य के लिए प्रेरित होने का अवसर प्रदान किया।


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