नेरी में स्थापित होगा पादप स्वास्थ्य निदान क्लीनिक

By: Oct 30th, 2026 12:55 am

नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने रखी आधारशिला, पौध स्वास्थ्य प्रबंधन को मजबूती देने के साथ ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
निजी संवाददाता-सोलन
हिमाचल प्रदेश में पौध स्वास्थ्य प्रबंधन को सुदृढ़ करने और बागवानी क्षेत्र को सहयोग प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में उद्यमिता विकास के लिए अत्याधुनिक पादप स्वास्थ्य निदान क्लिनिक की आधारशिला रखी गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने आज एक वर्चुअल समारोह के माध्यम से इस क्लिनिक की आधारशिला रखी। प्रस्तावित क्लिनिक के माध्यम से बागवानी फसलों के लिए रोग निदान, रोग निगरानी और परामर्श सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे किसानों, शोधकर्ताओं, प्रसार कार्यकर्ताओं और बागवानी अधिकारियों को लाभ मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पौधों में रोगों की समय रहते पहचान करना तथा फसलों के स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार के लिए सटीक एवं आवश्यकता-आधारित पौध संरक्षण उपायों को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर प्रो. बवेजा ने कहा कि रोगजनकों की समय पर पहचान से किसानों को लक्षित प्रबंधन उपाय अपनाने में मदद मिलेगी। इससे फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने तथा कीटनाशकों के अनावश्यक या बार-बार प्रयोग से बचने में सहायता मिलेगी। परिणामस्वरूप खेती की लागत, कीटनाशक अवशेषों और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ कीटनाशकों के प्रति रोगजनकों में प्रतिरोध विकसित होने की समस्या को रोकने में भी मदद मिलेगी। रोपण सामग्री और बहुवर्षीय पौधों के ऊतकों में रोगजनकों की समय रहते पहचान से नए बागानों में रोगों के प्रवेश को रोकने के लिए निवारक उपाय अपनाना भी संभव होगा।

जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि तापमान, आद्र्रता और वर्षा में बदलाव रोगजनकों के जीवित रहने, रोगों के विकास और उनके भौगोलिक विस्तार को प्रभावित कर रहे हैं। बागवानी स्नातकों और ग्रामीण युवाओं, किसान उत्पादक संगठनों तथा अन्य कृषि संस्थानों के सहयोग से शुल्क आधारित रोग निदान सेवाएं विकसित करने और किसानों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप रोग प्रबंधन समाधान उपलब्ध करवाने के अवसर मिलेंगे। इन पहलों से स्वरोजगार को बढ़ावा देने, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की उपलब्धता मजबूत करने और बागवानी मूल्य श्रृंखला में आय के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी। इससे पूर्व, औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी के अधिष्ठाता डा. एसके भारद्वाज ने कुलपति का स्वागत किया और प्रस्तावित क्लिनिक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि क्लिनिक में पारंपरिक एवं उन्नत रोग निदान तकनीकों को व्यवस्थित क्षेत्रीय निगरानी तथा मौसम आधारित रोग जोखिम आकलन के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे पौध रोगजनकों की शीघ्र एवं सटीक पहचान संभव हो सकेगी। इस अवसर पर डा. पीके बवेजा, विभागाध्यक्ष, कृषि मौसम विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग; डा. शशि शर्मा, डा. मोनिका शर्मा, डा. अमित शर्मा, डा. विकास शर्मा, डा. बंदना धीमान, डा. प्रीति चौधरी, डा. दीपक अग्निहोत्री तथा अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।


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