गिरिपार में श्रद्धा और उत्साह से मनाया आठों पर्व, दराड़ी पूजन के बाद जलाईं मशालें
दीपावली से तीन सप्ताह पहले मनाया जाता है त्योहार, सदियों पुरानी लोक परंपराओं और सिरमौरी संस्कृति की दिखी झलक
निजी संवाददाता-नौहराधार
जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में सदियों पुरानी लोक संस्कृति और परंपराओं का निर्वहन करते हुए रविवार रात दुर्गा अष्टमी यानी आठों का पर्व पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। क्षेत्र के हर गांव में इस त्योहार को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने दराड़ी के पवित्र जंगली फूलों से मां भवानी और गौरा की पूजा-अर्चना की। वहीं, शाम के समय पारंपरिक हुशू यानी मशालें जलाकर पर्व की रौनक बढ़ाई गई। दीपावली से करीब तीन सप्ताह पहले मनाए जाने के कारण इस त्योहार को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है।
दराड़ी पूजन की अनूठी परंपरा
गिरिपार क्षेत्र में दुर्गा अष्टमी यानी आठों पर्व पर दराड़ी पूजन का विशेष महत्त्व है। सिरमौर के हिमालयी जंगलों में पाए जाने वाले सफेद रंग के दराड़ी फूलों से डमरू जैसी आकृतियां तैयार की जाती हैं। इन्हीं के माध्यम से मां भवानी और गौरा की पूजा-अर्चना की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन पवित्र फूलों को सुबह घर का एक सदस्य बिना किसी से बातचीत किए और कुछ खाए-पिए जंगल से लाता है।
हुशू मशालें जलाने का विशेष महत्त्व
आठों पर्व पर हुशू यानी पारंपरिक मशालें जलाना भी विशेष महत्त्व रखता है। स्थानीय मान्यता है कि मशालों की रोशनी से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही वजह है कि गिरिपार के विभिन्न गांवों में ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मनाते हैं।
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