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दशहरा मनाने की कोशिश की, तो गई जान, जानिए सदियों पुरानी परंपरा का रहस्य?

By: Oct 19th, 2026 9:00 pm

हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में देवी-देवताओं की परंपराएं जितनी अनूठी हैं, उतनी ही रहस्यमयी भी। यहां कहीं देवी-देवताओं की भव्य शोभायात्राएं निकलती हैं, कहीं सदियों पुरानी देव परंपराओं के बीच मेले सजते हैं, तो कहीं ऐसे स्थल भी हैं जहां कुछ पर्व त्यौहार नहीं मनाए जाते। 20 अक्टूबर को देश भर में दशहरा मनाया जाएगा। कहीं रावण का 50 फुट तो कहीं 100 फुट का पुतला जलाए जाएगा। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक के तौर पर मनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिमाचल में कुछ स्थान ऐसे हैं जहां दशहरा मनाना तो दूर की बात है, बल्कि रावण को भी पूजनीय माना जाता है और ये स्थल कोई और नहीं बल्कि शिवभूमि भरमौर और बैजनाथ हैं, जहां भगवान शिव के भक्त रावण का न तो पुतला जलाते हैं न ही दशहरा मनाते हैं। अब सवाल ये है कि आखिर इन इलाकों में दशहरा क्यों नहीं मनाया जाता? क्या इसके पीछे भगवान शिव से जुड़ी कोई मान्यता है, या फिर सदियों से चली आ रही लोक आस्था ने यहां दशहरे को अलग पहचान दी है चलिए आज इसी पर बात करते हैं।

सबसे पहले कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ की बात करते हैं तो ये स्थल बेहद पवित्र है, क्योंकि यहां स्वयंभु शिवलिंग हैं, मान्यता है कि लंकापति रावण ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तपस्या की थी। इसलिए यहां रावण को भगवान शिव के अनन्य भक्त के रूप में भी देखा जाता है। जिस जगह रावण ने शिव की भक्ति की हो, वहाँ उसके पुतले को जलाना शिव का अपमान माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि आज से कई साल पहले कुछ लोगों ने दशहरा मनाने की कोशिश जब की, तो उनके साथ अनर्थ हो गया, जिसके बाद यहां कभी दशहरा मनाने की किसी ने नहीं सोची। यही नहीं यहां आपको कहीं भी सोने की एक दुकान तक नहीं मिलेगी। इसके पीछे की कहानी भी जुड़ी है देवी पार्वती से।

बैजनाथ की ही तरह चंबा जिले के भरमौर में भी दशहरा नहीं मनाया जाता है, न ही रामलीला का आयोजन होता है। क्योंकि ये स्थल भी रावण की तपोभूमि रही है, यहां पर चौरासी मंदिर परिसर में रावण का मंदिर भी है। यह मंदिर अर्धगंगा कुंड के साथ है। कहा जाता है कि यहां भक्त मनचाही मन्नतें मांगने दूर-दूर से पहुंचते हैं। तो कुल मिलाकर हम ये कह सकते हैं कि हिमाचल एक ऐसा स्थान हैं जहां न केवल देवी- देवता बल्कि उनके अनन्य भक्तों का भी सम्मान करता है। हिमाचल के भरमौर और बैजनाथ में रावण को सम्मानीय माना जाता है


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