BBN News : गत्ता उद्योग पांच दिन बंद, पुराने दाम पर बॉक्स आपूर्ति के दबाव के बीच बड़ा फैसला
दिव्य हिमाचल ब्यूरो — बीबीएन
क्राफ्ट पेपर की बढ़ती कीमतों और पुराने दाम पर बॉक्स आपूर्ति के दबाव के बीच हिमाचल के गत्ता उद्योगों ने पांच दिन काम बंद रखने का फैसला लिया है। हिमाचल प्रदेश कोरुगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की बद्दी में हुई आपात बैठक में 14 से 18 अक्तूबर तक उत्पादन और डिलीवरी पूरी तरह रोकने पर सहमति बनी। एसोसिएशन का कहना है कि जुलाई से क्राफ्ट पेपर के दाम करीब 30 फीसदी बढ़ चुके हैं, जबकि ग्राहक कंपनियां बॉक्स की दरें बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। लगातार घाटे के कारण अब कारखाने चलाना मुश्किल हो गया है। गत्ता बॉक्स की अधिकांश आपूर्ति फार्मा इकाइयों को होने से बंदी का असर दवा उद्योग की पैकेजिंग और माल की निकासी पर भी पड़ सकता है। नालागढ़ में आयोजित बैठक में बीबीएन सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के गत्ता उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया। एसोसिएशन के प्रतिनिधि हेमराज चौधरी ने बताया कि क्राफ्ट पेपर के अलावा गोंद, स्टिचिंग वायर, रंग, मालभाड़ा, एलपीजी और मजदूरी की लागत भी बढ़ी है। इसके बावजूद ग्राहक कंपनियां पुरानी दरों पर ही आपूर्ति का दबाव बना रही हैं। हेमराज चौधरी के अनुसार कई कारखानों में पेपर का पुराना स्टॉक खत्म हो चुका है और आर्थिक तंगी के चलते नया कच्चा माल खरीदना मुश्किल हो रहा है।
पेपर की कमी से उत्पादन प्रभावित है और मजदूरों के पास भी पर्याप्त काम नहीं बचा है। बैठक में उद्योगपतियों ने कहा कि ग्राहक कंपनियों को बढ़ी लागत के अनुरूप बॉक्स की दरों में संशोधन करना होगा, तभी नियमित उत्पादन और आपूर्ति जारी रखना संभव होगा।एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि इससे पहले हरियाणा के सोनीपत में उत्तर भारत के छह राज्यों के गत्ता उद्योगों की बैठक हुई थी। इसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड की करीब 250 गत्ता फैक्टरियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। बैठक में छह दिन तक पेपर मिलों से खरीद रोकने और उत्पादन सीमित करने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में हिमाचल के उद्योगपतियों ने अब पांच दिन की पूर्ण बंदी का फैसला लिया है। एसोसिएशन ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पेपर मिलों की मूल्य वृद्धि की जांच करवाने की मांग भी उठाई है। उद्योगपतियों का कहना है कि कई मिलों की ओर से एक ही दिन दरें बढ़ाए जाने से आपसी तालमेल के जरिए कीमतें तय करने का संदेह पैदा होता है।
उन्होंने मांग की कि यदि जांच में ऐसी स्थिति सामने आती है तो भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के माध्यम से नियमानुसार कार्रवाई की जाए। एसोसिएशन के अनुसार हिमाचल में 250 से अधिक गत्ता फैक्टरियां संचालित हैं, जिनसे 40 हजार से ज्यादा मजदूरों का रोजगार जुड़ा है। प्रदेश में क्राफ्ट पेपर की मासिक खपत करीब 50 हजार टन है, जबकि यहां संचालित पांच पेपर मिलों की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 20 हजार टन प्रतिमाह है। संगठन का दावा है कि इन मिलों का आधे से अधिक माल प्रदेश से बाहर जाता है। ऐसे में स्थानीय गत्ता उद्योगों को उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से पेपर मंगवाना पड़ता है। एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से नई पेपर मिलों की स्थापना को प्रोत्साहन देने की मांग की हैए ताकि बाहरी राज्यों पर निर्भरता और मालभाड़े का बोझ कम हो सके। बैठक में तय किया गया कि 14 से 18 अक्तूबर तक गत्ता कारखानों में उत्पादन और ग्राहक कंपनियों को डिलीवरी बंद रहेगी। इस दौरान बढ़ी दरों पर क्राफ्ट पेपर की खरीद नहीं की जाएगी और कच्चा माल लेकर आने वाले ट्रकों को भी खाली नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन ने कहा कि ग्राहक कंपनियों ने लागत के अनुरूप दरों में बढ़ोतरी स्वीकार नहीं की और हालात नहीं सुधरे तो बंदी आगे भी बढ़ सकती है।
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