नशा मुक्ति केंद्रों में नशा मिला तो संचालक पर चलेगा केस
डीसी की दो टूक, केंद्रों में सुरक्षित और नशामुक्त माहौल जरूरी, 30 मरीजों पर एक पूर्णकालिक काउंसलर अनिवार्य, पुनर्वास की गुणवत्ता सुधारने के दिए निर्देश
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार के लिए आने वाले लोगों को अगर नशा उपलब्ध करवाने की शिकायत सामने आती है तो अब प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। नशा मुक्ति केंद्रों में नशे का कारोबार पाए जाने पर केंद्र के मालिक के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। मंगलवार को बचत भवन में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के संचालकों और प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में यह बात सामने आई। उपायुक्त ने कहा कि नशा मुक्ति केंद्रों में सुरक्षित और पूरी तरह नशा मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना संचालकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रों के संचालन में निर्धारित नियमों और मानकों की अनदेखी पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. यशपाल रांटा और डा. कुशाल वर्मा ने नशा मुक्ति एवं पदार्थ उपयोग विकार उपचार केंद्रों के न्यूनतम मानकों की जानकारी दी। केंद्रों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।
श्रेणी-1 में एक माह से कम अवधि के डिटॉक्सिफिकेशन और अल्पकालिक उपचार, श्रेणी-2 में एक माह या उससे अधिक अवधि के दीर्घकालिक उपचार, पुनर्वास, काउंसलिंग और व्यावसायिक पुनर्वास तथा श्रेणी-3 में नशे के साथ प्राथमिक मनोरोग बीमारी के उपचार की व्यवस्था शामिल है। केंद्रों में प्रशिक्षित चिकित्सक और जरूरत के अनुसार मनोचिकित्सक की उपलब्धता अनिवार्य है। ओवरडोज के मामलों में 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा, जबकि महिला और नाबालिग मरीजों के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ की ऑन-कॉल सुविधा होनी चाहिए। प्रत्येक 30 मरीज पर कम से कम एक पूर्णकालिक काउंसलर जरूरी है। हर मरीज का पंजीकरण कर यूनिक आईडी बनानी होगी। असेसमेंट, लिखित सहमति, प्रिस्क्रिप्शन, दवाओं का रिकॉर्ड, मनोसामाजिक हस्तक्षेप और डिस्चार्ज समरी सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। बिना चिकित्सकीय और मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन के भर्ती नहीं किया जा सकेगा। मरीज या प्रथम श्रेणी के परिजन की लिखित सहमति भी जरूरी होगी। उपचार में डब्ल्यूएचओ के अनुशंसित प्रोटोकॉल अपनाने, बच्चों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आयु एवं जेंडर संवेदनशील व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा, प्रयोगशाला सुविधा और शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। एसएसपी गौरव सिंह ने कहा कि नशा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई के साथ पीडि़तों के उपचार और पुनर्वास पर भी समान गंभीरता जरूरी है। उपायुक्त ने केंद्र संचालकों को सुविधाओं, स्टाफ, रिकॉर्ड, सुरक्षा और मरीजों की देखभाल में सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला के केंद्र प्रदेशभर के लिए बेहतर उदाहरण बनें और प्रशासन इनकी संस्थागत निगरानी तथा पुनर्वास की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देगा।
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