टनल निर्माण से घरों में दरारें, सुरक्षा पर उठे सवाल
ट्विन टनल संघर्ष समिति ने मांगी ठोस कार्रवाई, प्रभावित बोले, विकास के खिलाफ नहीं, सुरक्षित विकास की जरूरत
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
शिमला में एनएचएआई के फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत निर्माणाधीन ट्विन टनल अब आसपास बसे सैकड़ों परिवारों के लिए चिंता का कारण बन गई है। संजौली, शांतिविहार, भट्टाकुफर, ढली और चलौंठी क्षेत्र के प्रभावित परिवारों ने टनल निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर लोगों के घरों और जान-माल की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। प्रभावितों का आरोप है कि टनल निर्माण के बाद कई घरों में दरारें आई हैं और लगातार निर्माण से भविष्य में खतरा और बढ़ सकता है। मंगलवार को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रभावित परिवारों और ट्विन टनल संघर्ष समिति ने पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया।
प्रभावितों ने कहा कि टनल निर्माण शुरू होने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। निर्माण के दौरान घरों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी, लेकिन प्रभावित परिवारों को अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है। कई परिवारों का कहना है कि वे करीब डेढ़ साल से अपने घरों से बाहर रहने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों ने दो टूक कहा कि सडक़ और टनल जैसी बड़ी परियोजनाएं क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन इसकी कीमत आम लोगों को अपने घरों की सुरक्षा गंवाकर नहीं चुकानी चाहिए। उनका कहना है कि जिन घरों में दरारें आई हैं, वहां रहने वाले परिवार हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका में जी रहे हैं। ऐसे में निर्माण कार्य के साथ प्रभावित घरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने ट्विन टनल संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति की ओर से प्रभावित परिवारों की समस्याओं, घरों की स्थिति और टनल निर्माण से जुड़े सुरक्षा पहलुओं को लगातार उठाया जा रहा है। समिति ने आरोप लगाया कि प्रभावितों की समस्याओं का अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। परिवारों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षा और नुकसान की भरपाई को लेकर ठोस कार्रवाई चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद बढ़ी उम्मीद
प्रभावितों ने बताया कि मामले में सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद हाई पावर कमेटी ने शिमला पहुंचकर एनएचएआई प्रोजेक्ट और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। कमेटी ने संजौली समेत अन्य क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनीं। समिति ने मामले की रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपने की बात कही है। कमेटी के निरीक्षण के बाद प्रभावित परिवारों को उम्मीद जगी है कि उनके घरों और जान-माल की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अब गंभीरता से कार्रवाई होगी।
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