Divya Himachal Survey : हिमाचल के मुकाबले क्यों हिट है हरियाणा का खेल मॉडल, जानिए
दिव्य हिमाचल सर्वे में 53 फीसदी लोग बोले, पड़ोसी प्रदेश की तर्ज पर हमारा प्रदेश भी निखार सकता है खेल प्रतिभाएं
खेल बजट और अकादमियों की संख्या बढ़ाने पर जोर, 39 फीसदी ने जताई असमर्थता
खेलो इंडिया में हरियाणा के 117 के मुकाबले हिमाचल के पांच मेडल, विंटर गेम्स में पहाड़ी प्रदेश का दम
जीवन ऋषि , मटौर
क्या हरियाणा की तर्ज पर हिमाचल भी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में सक्षम है? ‘दिव्य हिमाचल’ के साप्ताहिक सर्वे में 53 फीसदी लोगों ने इस सवाल का जवाब ‘हां’ में देकर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं पर भरोसा जताया है। वहीं, 39 फीसदी लोगों को लगता है कि हिमाचल के लिए हरियाणा के खेल मॉडल की बराबरी करना आसान नहीं होगा, जबकि आठ फीसदी ने ‘पता नहीं’ में जवाब दिया। सर्वे में कुल 460 लोगों ने भाग लिया। नतीजे बताते हैं कि लोगों को हिमाचल की प्रतिभा पर भरोसा है, लेकिन इस प्रतिभा को निखारने के लिए मजबूत खेल ढांचे, पर्याप्त बजट और बेहतर सुविधाओं की जरूरत भी महसूस की जा रही है। हरियाणा का सालाना खेल बजट करीब 554 करोड़ रुपए बताया गया है, जबकि हिमाचल का इस साल का खेल बजट लगभग 50 करोड़ रुपए तक है। खेल अकादमियों की संख्या में भी दोनों राज्यों के बीच अंतर है। हरियाणा में 20 खेल अकादमियों के मुकाबले हिमाचल में 11 अकादमियां हैं। हरियाणा सरकार ने जून 2026 में जानकारी दी थी कि वहां 260 उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। हिमाचल में भी खेल कोटे के तहत नियुक्तियां हुई हैं, लेकिन खिलाडिय़ों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी को हरियाणा में छह करोड़ रुपए, जबकि हिमाचल में पांच करोड़ रुपए देने का प्रावधान बताया गया है।
मेडल के आंकड़े भी दोनों राज्यों की खेल तस्वीर के अलग-अलग पहलू सामने रखते हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में हरियाणा ने 117 पदक जीते, जबकि हिमाचल के खाते में पांच पदक आए। इसके उलट, खेलो इंडिया विंटर गेम्स में हिमाचल ने 14 पदक जीतकर हरियाणा के सात पदकों से दोगुनी उपलब्धि हासिल की। यह साबित करता है कि हिमाचल में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन शीतकालीन खेलों से आगे दूसरे खेलों में भी प्रतिभाओं को निखारने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे। सर्वे में प्रतिक्रिया देते हुए हरीश इशू शर्मा ने लिखा कि जब तक गांवों में खेल मैदान और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान, प्रशिक्षित कोच, आधुनिक उपकरण, खिलाडिय़ों के लिए पौष्टिक डाइट और नियमित प्रतियोगिताएं उपलब्ध कराना जरूरी है। साथ ही, खेल कोटे के तहत समयबद्ध भर्ती और पदक विजेताओं को बेहतर प्रोत्साहन मिलने से युवाओं का खेलों के प्रति रुझान बढ़ सकता है।
सर्वे का संदेश साफ है—हिमाचल के पास प्रतिभा है, लेकिन उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदकों में बदलने के लिए सुविधाओं का विस्तार करना होगा। खेल बजट में बढ़ोतरी के साथ उसके खर्च और खिलाडिय़ों तक पहुंचने वाली सहायता का पारदर्शी हिसाब भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पंचायत और स्कूल स्तर पर खेल नर्सरियां विकसित हों तथा खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण से लेकर रोजगार तक भरोसेमंद व्यवस्था मिले, तो हिमाचल अपनी खेल क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
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