शिमला के पानी पर देश-विदेश के विशेषज्ञों का महामंथन

By: Oct 7th, 2026 12:01 am

भूटान-नेपाल समेत कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए जल प्रबंधन के मॉडल, रिसाव रोकने और गुणवत्ता निगरानी पर जोर, भविष्य की जरूरत के हिसाब से बनेगी जल सेवा व्यवस्था

स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
शिमला जैसे पहाड़ी शहर में बढ़ती आबादी और पर्यटन के दबाव के बीच शहरवासियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए अब जल प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को शिमला में शहरी जल प्रबंधन और सेवा वितरण को लेकर देश-विदेश के विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने मंथन किया। एसजेपीएनएल और विश्व बैंक की ओर से आयोजित ज्ञान-विनिमय कार्यक्रम में भूटान, नेपाल सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने शहरी जल सेवाओं से जुड़े अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में शिमला शहरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरीश जनारथा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान विशेष अतिथि रहे। उप-महापौर उमेश भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम में शहरी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता, पेयजल की गुणवत्ता, जल प्रबंधन और लोगों तक बेहतर सेवा पहुंचाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें अलग-अलग राज्यों और देशों में अपनाए जा रहे सफल जल प्रबंधन मॉडल को साझा किया गया। साथ ही शिमला जैसे पहाड़ी शहरों में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया। मुख्य अतिथि विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि शिमला में लोगों को गुणवत्तापूर्ण और नियमित पेयजल उपलब्ध करवाना प्राथमिकता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां जल स्रोतों, भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती आबादी के कारण पानी की व्यवस्था अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में शहर की मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर जल सेवा व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिमला शहर में पानी की कमी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

आने वाले समय में शहरवासियों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पानी उपलब्ध करवाने के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जो लंबे समय तक प्रभावी रहे। इसके लिए जल संरक्षण, आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन को साथ लेकर चलना होगा। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि केवल नए जल स्रोत विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपलब्ध पानी का सही प्रबंधन और उसकी बर्बादी रोकना भी उतना ही जरूरी है। जल वितरण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल से रिसाव कम करने, पानी की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने की दिशा में काम किया जा सकता है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ भूटान और नेपाल से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जल प्रबंधन से जुड़े अनुभव साझा किए। सफल व्यवस्थाओं और सामने आई चुनौतियों पर चर्चा करते हुए शिमला की परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर मॉडल विकसित करने पर विचार किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवों से सीख लेकर शहरी जल सेवाओं को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और लोगों की जरूरत के अनुरूप बनाना रहा।


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