बिलासपुर से दूरदराज-दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचाएं विशेषज्ञ सेवाएं

By: Oct 7th, 2026 12:02 am

डॉक्टर बनना केवल पेशा नहीं, मानवता की सेवा का संकल्प, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एम्स के पहले स्नातकों को दी सीख

स्टाफ रिपोर्टर-बिलासपुर
बिलासपुर की धरती पर मंगलवार को उस समय ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ, जब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संस्थान के पहले बैच के स्नातक चिकित्सकों को डिग्रियां प्रदान कीं। राष्ट्रपति ने 89 डॉक्टरों को सम्मानित किया जबकि पांच मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने नए चिकित्सकों को चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का संकल्प मानकर कार्य करने का संदेश दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार सुबह करीब 10:35 बजे एम्स बिलासपुर के हेलिपैड पर पहुंचीं। इसके बाद वह सीधे दीक्षांत समारोह स्थल पर पहुंचीं। समारोह का शुभारंभ 10:45 बजे शुरू हुआ।

लगभग 75 मिनट की अवधि तक राष्ट्रपति समारोह में रही जिसमें इस समयावधि के भीतर ही डॉक्टरों को डिग्रियां और पांच मेधावियों को गोल्ड मेडल बांटने, राष्ट्रगान और ग्रुप फोटो खिंचवाने के साथ-साथ महामहिम ने 11:35 से 11:50 बजे लगभग 15 मिनट तक प्रेरणादाकक भाषण दिया। समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सहित प्रदेश के वरिष्ठ नेता, एम्स प्रशासन, चिकित्सक, विद्यार्थी और अभिभावक मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स से निकलने वाले पहले स्नातक इस संस्थान की पहचान और विरासत की नींव रखने वाली पहली पीढ़ी हैं। आने वाले विद्यार्थी इन्हीं के कार्यों और आचरण से प्रेरणा लेंगे। ऐसे में इन डॉक्टरों का व्यवहार, मेहनत, प्रतिबद्धता और सेवा भावना एम्स की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी। राष्ट्रपति ने एम्स बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए संस्थान की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना चुनौती है। एम्स को टेलीमेडिसिन, विशेषज्ञ परामर्श, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से दूरदराज क्षेत्रों की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।

एम्स में तीन साल में 12 लाख से अधिक ओपीडी
राष्ट्रपति ने एम्स बिलासपुर की कम समय में हासिल की गई उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि पिछले करीब तीन वर्षों में एम्स में 12 लाख से अधिक लोगों ने ओपीडी और एक लाख से अधिक लोगों ने आईपीडी सेवाओं का लाभ उठाया है। उन्होंने इसे एम्स बिलासपुर की तेजी से बढ़ती भूमिका का संकेत बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में एम्स न केवल बिलासपुर और हिमाचल, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोगों को भी बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाएगा।

कुर्ता-पायजामा और टोपी में डिग्री लेने पहुंचे डॉक्टर
दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों के लिए पारंपरिक पहनावा निर्धारित किया गया था। पुरुष और महिला चिकित्सकों ने कुर्ता-पायजामा व टोपी पहनकर डिग्री प्राप्त की। समारोह में अपने प्रथम बैच को डिग्री लेते देख एम्स परिसर में विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह का माहौल रहा।


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