खाद संकट पर फूटा किसानों का गुस्सा

By: Oct 9th, 2026 12:55 am

पांवटा साहिब में आज कृषि विभाग कार्यालय का घेराव करेंगे किसान संगठन
कार्यालय संवाददाता – पांवटा साहिब
हिमाचल प्रदेश के किसानों के सामने खाद की किल्लत और नई सरकारी व्यवस्था को लेकर गहरा संकट खड़ा हो गया है। इसके विरोध में हिमाचल किसान सभा और भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने संयुक्त रूप से नौ अक्तूबर शुक्रवार को कृषि विभाग कार्यालय पांवटा साहिब का घेराव करने का निर्णय लिया है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष तरसेम सिंह सग्गी और हिमाचल किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह गोपी ने सरकार के नए नियमों को तुगलकी फरमान करार दिया है। उन्होंने बताया कि अब खाद के लिए एक विशेष आईडी मांगी जा रही है, जिसे बनवाने में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व विभाग की अधूरी तैयारियों के कारण आईडी नहीं बन पा रही है और जिनकी बन रही है उनमें जमीन का पूरा विवरण नहीं चढ़ रहा है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने एक एकड़ पर पूरे वर्ष में मात्र दो बैग खाद देने का नियम बनाया है, जबकि साल में तीन फसलें उगाने के लिए कहीं अधिक खाद की आवश्यकता होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जान-बूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कर रही है, ताकि किसान खेती छोड़ दें और एमएसपी या आंदोलन की मांग न कर सकें। किसान संगठनों ने मांग की है कि सरकार और विभाग पुरानी व्यवस्था को बहाल करते हुए आधार कार्ड पर ही खाद उपलब्ध करवाए। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष तरसेम सिंह सग्गी ंने चेतावनी दी है कि नौ अक्तूबर का घेराव केवल सांकेतिक है। यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मुद्दे को 13 और 14 अक्तूबर को रामपुर बुशहर में होने वाले हिमाचल किसान सभा के राज्य सम्मेलन में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। दोनों संगठनों ने सभी किसान भाइयों से आह्वान किया है कि वह अपनी फसलों की व्यस्तता के बावजूद शुक्रवार को सुबह 10 बजे रेस्ट हाउस पांवटा साहिब में भारी संख्या में पहुंचे, ताकि सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की जा सके।

हिमाचल प्रदेश के किसानों के सामने खाद की किल्लत और नई सरकारी व्यवस्था को लेकर गहरा संकट खड़ा हो गया है। इसके विरोध में हिमाचल किसान सभा और भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने संयुक्त रूप से नौ अक्तूबर शुक्रवार को कृषि विभाग कार्यालय पांवटा साहिब का घेराव करने का निर्णय लिया है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष तरसेम सिंह सग्गी और हिमाचल किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह गोपी ने सरकार के नए नियमों को तुगलकी फरमान करार दिया है। उन्होंने बताया कि अब खाद के लिए एक विशेष आईडी मांगी जा रही है, जिसे बनवाने में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व विभाग की अधूरी तैयारियों के कारण आईडी नहीं बन पा रही है और जिनकी बन रही है उनमें जमीन का पूरा विवरण नहीं चढ़ रहा है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने एक एकड़ पर पूरे वर्ष में मात्र दो बैग खाद देने का नियम बनाया है, जबकि साल में तीन फसलें उगाने के लिए कहीं अधिक खाद की आवश्यकता होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जान-बूझकर ऐसी बाधाएं पैदा कर रही है, ताकि किसान खेती छोड़ दें और एमएसपी या आंदोलन की मांग न कर सकें। किसान संगठनों ने मांग की है कि सरकार और विभाग पुरानी व्यवस्था को बहाल करते हुए आधार कार्ड पर ही खाद उपलब्ध करवाए। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष तरसेम सिंह सग्गी ंने चेतावनी दी है कि नौ अक्तूबर का घेराव केवल सांकेतिक है। यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मुद्दे को 13 और 14 अक्तूबर को रामपुर बुशहर में होने वाले हिमाचल किसान सभा के राज्य सम्मेलन में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। दोनों संगठनों ने सभी किसान भाइयों से आह्वान किया है कि वह अपनी फसलों की व्यस्तता के बावजूद शुक्रवार को सुबह 10 बजे रेस्ट हाउस पांवटा साहिब में भारी संख्या में पहुंचे, ताकि सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की जा सके।


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