नरवणे की किताब से वांगचुक के आंदोलन तक, कसौली में उठेंगे बड़े सवाल, लोकतंत्र और पर्यावरण पर होगा मंथन

By: Oct 23rd, 2026 12:06 am

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतंत्र और पर्यावरण पर होगा मंथन

प्रधान संवाददाता-कसौली

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान कसौली की गुनगुनी ठंड में भी विचार गर्म रहेंगे। लिटफेस्ट में इस बार साहित्य की महक के साथ देश के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा होने की उम्मीद है। इस महफिल में पंजाबी गायक सतिंदर सरताज सुर साधना करते हुए भी नजर आएंगे। लद्दाख अंदोलन से लेकर सोनम वांगचुक की हिरासत और पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अभी तक अप्रकाशित किताब फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी का पूरा सच सामने आएगा। इस बार लिटफेस्ट की थीम द आर्ट ऑफ डिसएग्रीमेंट है। साहित्य के साथ राजनीति, लोकतंत्र, पर्यावरण और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय भी एजेंडे में हैं। 23 से 25 अक्तूबर तक देश की जानी-मानी हस्तियां कसौली में एक साथ असहमति की कला पर चर्चा करने वाली हैं। लिटफेस्ट में सबसे ज्यादा निगाहें पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल नरवणे पर टिकी हैं।

उनकी किताब के अंशों को लेकर फरवरी 2026 में लोकसभा में राहुल गांधी ने सरकार को घेरा था। रक्षा मंत्रालय की मंजूरी लंबित होने के कारण किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हो सकी है। लिटफेस्ट में नरवणे के सत्र में सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा और उनके कार्यकाल के अनुभवों पर बात होने की उम्मीद है। ऐसे में किताब के विवादित हिस्से पर भी चर्चा होगी? यह देखना दिलचस्प होगा। लिटफेस्ट में दूसरा बड़ा आकर्षण पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक हैं।

सतिंदर सरताज बिखेरेंगे संस्कृति के रंग

लिटफेस्ट में फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली कहानियों और सिनेमा की दुनिया लेकर आएंगे, तो पंजाबी गायक सतिंदर सरताज संगीत और संस्कृति के रंग बिखेरेंगे। अभिनेत्री-लेखिका दिव्या दत्ता समेत दर्जनों लेखक, पत्रकार, सैन्य अधिकारी, विशेषज्ञ और कलाकार शामिल होंगे। इस सूची में परवाना नूरानी, नील कमल पुरी, गीतांजलि जे. आंगमो, एसएस दुलत, राहुल अकरकर, चेतना कीर, किशन सांगवान, अमन नाथ, निबु एलियास, विशाल भट्टाचार्य, रेणु सिंह, रूपिंदर लाल सहित कई नाम शामिल हैं।

राज विला से लंबा रिश्ता

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट को लेकर एक सवाल उठता है कि आखिर यह महोत्सव दिल्ली, मुंबई या जयपुर जैसे बड़े शहरों में न होकर क्यों हमेशा कसौली में ही आयोजित किया जाता है? इसका एक ही जवाब है राज विला। खुशवंत सिंह और कसौली का गहरा नाता रहा है। खुशवंत सिंह खुद को आधा हिमाचली कहते थे। 1947 में विभाजन के बाद लाहौर से आकर उनका परिवार कसौली पहुंचा। यहां अपर मॉल पर स्थित राज विला उनके ससुराल से विरासत में मिला था। ब्रिटिश काल का यह बंगला उनके लिए सिर्फ घर नहीं, बल्कि रचनात्मक शरणस्थली बन गया था। पचास साल से ज्यादा समय तक खुशवंत सिंह हर गर्मी इसी राज विला में बिताते थे। उन्होंने अपनी ज्यादातर किताबें यहीं लिखीं हैं। कसौली की शांत वादियां, चीड़ के जंगल और कसौली क्लब की शामें उनके लेखन का हिस्सा रही हैं।

किशोरों के लिए नई पहल

लिटफेस्ट में 12 से 18 साल के किशोरों के लिए केएसएलएफ यंग वॉयसेज नाम की नई पहल भी शुरू की जा रही है। इसका मकसद युवाओं में पढऩे की आदत बढ़ाना, सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करना और अपनी बात रखने का मौका देना है।

2012 से शुरुआत

कसौली में आज खुशवंत सिंह ट्रैक नाम का नेचर वॉक भी है। महोत्सव के मुख्य आयोजक राहुल सिंह हैं। वह खुशवंत सिंह के पुत्र और अनुभवी पत्रकार हैं। वह महोत्सव के निदेशक हैं। इस साल की क्यूरेटर मधुर सिंह हैं। महोत्सव को खुशवंत सिंह फाउंडेशन चलाता है। इसकी शुरुआत 2012 में हुई थी, जब खुशवंत सिंह अभी जीवित थे। ब्रिगेडियर अनंत नारायणन और उनकी पत्नी अपर्णा के सहयोग से कसौली क्लब में पहला लिटफेस्ट हुआ।


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