आईजीएमसी में टेस्ट की लंबी वेटिंग, अल्ट्रासाउंड से पैट स्कैन तक मरीज परेशान
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में रेडियोलॉजी और एडवांस्ड डायग्नोस्टिक जांचों की लंबी वेटिंग मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अल्ट्रासाउंड की बढ़ती मांग, दो एमआरआई मशीनें उपलब्ध होने और अत्याधुनिक पैट स्कैन सुविधा शुरू होने के बावजूद मरीजों को जांच के लिए कई दिनों से लेकर महीनों बाद तक की तारीखें मिल रही हैं। इससे उपचार में देरी हो रही है और मरीज निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में हजारों रुपए खर्च करने को मजबूर हैं। आईजीएमसी में प्रदेशभर से रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। बीमारी की पुष्टि और आगे के उपचार की दिशा तय करने के लिए चिकित्सक अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन और पैट स्कैन जैसी जांचें करवाने की सलाह देते हैं। हालांकि, लंबी वेटिंग के चलते मरीजों को समय पर जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सबसे अधिक परेशानी दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को झेलनी पड़ रही है। जांच के लिए बार-बार शिमला आने से उनका समय और आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं, पैट स्कैन जैसी महंगी और अत्याधुनिक जांच के लिए भी मरीजों को औसतन सात दिन से एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर जांच नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है और उपचार प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
रोजाना पांच से आठ पैट स्कैन
अस्पताल में करीब छह महीने पहले शुरू हुई पैट स्कैन सुविधा के तहत रोजाना पांच से आठ मरीजों की जांच हो रही है। मशीन की क्षमता प्रतिदिन छह से नौ जांच की है। इसके बावजूद बढ़ती मांग के कारण मरीजों को सात दिन से एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
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