हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा; आज से शारदीय नवरात्र, जानिए घटस्थापना के शुभ मुहूर्त
नौ दिन तक होगी मां के नौ स्वरुपों की पूजा-अर्चना, पहले दिन घटस्थापना के साथ शुरू होगा पर्व
शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्तूबर से शुरू होंगे। हालांकि, प्रतिपदा तिथि दस अक्तूबर की रात नौ बजकर 19 मिनट पर आरंभ हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार नवरात्र का पहला दिन 11 अक्तूबर, रविवार को मनाया जाएगा। नौ दिन तक चलने वाले इस पावन पर्व के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी और घरों में घटस्थापना कर श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करेंगे। नवरात्र का समापन 20 अक्तूबर को दशहरे के साथ होगा…
टीम-धर्मशाला, जवाली
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा अपने भक्तों के बीच आती हैं और सच्चे मन से की गई आराधना से सुख, समृद्धि, आरोग्य तथा खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नवरात्र के प्रत्येक दिन मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ और दुर्गा सप्तशती के पाठ के माध्यम से माता की आराधना करते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। धार्मिक मान्यताओं में हाथी पर माता का आगमन अच्छी वर्षा, धन-धान्य में वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इससे किसानों को खेती में लाभ मिलने तथा समाज में सुख-समृद्धि बढऩे की मान्यता भी जुड़ी हुई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार नवरात्र के पहले दिन दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रीय संयोग भी बन रहा है।
घटस्थापना के शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्र के पहले दिन 11 अक्तूबर को घटस्थापना के लिए सुबह छह बजकर 19 मिनट से दस बजकर 12 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु अपनी सुविधा, स्थानीय पंचांग के अनुसार इन मुहूर्तों में घटस्थापना कर सकते हैं।
शक्ति और नई शुरुआत
मां शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में पूजित मां शैलपुत्री दृढ़ता, साहस और स्थिरता की प्रतीक हैं। इनकी पूजा जीवन में संकल्प और आत्मबल का संदेश देती है।
तपस्या, संयम और भक्ति
मां ब्रह्मचारिणी
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कठिन साधना, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
वीरता, निर्भीकता और रक्षा
मां चंद्रघंटा
मां चंद्रघंटा का दुष्ट शक्तियों के विनाश और भक्तों की रक्षा से जुड़ा है। वे साहस के साथ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।
ऊर्जा और जीवन का विस्तार
मां कूष्मांडा
मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। उनका स्वरूप सृजनात्मक ऊर्जा, प्रकाश और जीवन शक्ति का प्रतीक है ।
शांति और सौम्यता
मां महागौरी
मां महागौरी निर्मलता, क्षमा और शांति की प्रतीक हैं। उनकी पूजा आत्मशुद्धि, और जीवन में शांति की कामना से की जाती है।
मातृत्व और करुणा
मां स्कंदमाता
भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजित मां स्कंदमाता ममता, संरक्षण और नि:स्वार्थ प्रेम की प्रतीक हैं। इनकी आराधना में मातृशक्ति के कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण किया जाता है।
न्याय और दुष्टों का संहार
मां कात्यायनी
मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी के शक्तिशाली स्वरूप से जोड़ा जाता है। वे अन्याय के अंत, धर्म की रक्षा और अधर्म पर विजय की प्रतीक हैं।
भय का नाश
मां कालरात्रि
मां कालरात्रि का उग्र स्वरूप बुरी शक्तियों के विनाश और भय से मुक्ति का प्रतीक है। उनका संदेश है कि अंधकार कितना भी गहरा हो, शक्ति और साहस से उसका सामना किया जा सकता है।
सिद्धि और ज्ञान
मां सिद्धिदात्री
मां सिद्धिदात्री को सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। वे ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक हैं। नवरात्र के अंतिम दिन उनकी पूजा साधना की पूर्णता और देवी के समग्र स्वरूप का स्मरण कराती है।
Keep watching our YouTube Channel ‘Divya Himachal TV’. Also, Download our Android App or iOS App
