हिमाचल के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, सीनियोरिटी पर आया बड़ा फैसला
दिव्य हिमाचल ब्यूरो—शिमला
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी वरिष्ठता: हिमाचल प्रदेश में अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों की पहली नियुक्ति से वरिष्ठता को लेकर सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार कदम उठाने जा रही है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारी एक्ट के खारिज होने के बाद राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में आज एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की वरिष्ठता नए सिरे से निर्धारित (री-ड्रॉ) करने का निर्णय लिया गया है। इस बैठक में वित्त, कार्मिक और शिक्षा विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। राज्य सरकार की ओर से तय किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई चार महीने की अवधि पूरी होने के बाद वरिष्ठता पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
चार महीने की समय सीमा 29 जुलाई 2026 के सुप्रीम कोर्ट आदेश से जुड़ी है। इसे 29 नवंबर 2026 के आसपास पूरा होना है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वरिष्ठता का लाभ भर्ती नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया और कमीशन के माध्यम से चयनित कर्मचारियों को ही दिया जाएगा। आज की बैठक के बाद अनुबंध अवधि को वरिष्ठता में शामिल करने के संबंध में कार्मिक विभाग विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। इस पूरे विवाद की शुरुआत ताज मोहम्मद बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले से जुड़ी है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2023 को स्पष्ट किया था कि जिन कर्मचारियों की शुरुआती अनुबंध नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत निर्धारित चयन प्रक्रिया और खुली प्रतिस्पर्धा के माध्यम से हुई है, उनकी अनुबंध सेवा को नियमितीकरण के बाद वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों के लिए गिना जा सकता है।
इस फैसले में हाईकोर्ट ने पूर्व में दिए गए नरेंदर सिंह नाइक मामले के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के सीधी भर्ती वाले क्लास टू इन्जीनियर एसोसिएशन के फैसले के सिद्धांतों का भी सहारा लिया था। राज्य सरकार की चुनौती सुप्रीम कोर्ट में भी सफल नहीं हुई थी। इसके बाद अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ देने से संबंधित अदालती फैसलों के प्रभाव को सीमित करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2024 का कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्त अधिनियम बनाया, जिसे 2025 में लागू किया गया। इस कानून के जरिए वरिष्ठता को नियमित नियुक्ति/नियमितीकरण की तारीख से जोडऩे का प्रावधान किया गया था। हिमाचल हाई कोर्ट ने 25 अप्रैल, 2026 को देवेंद्र कुमार एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले में कर्मचारी एक्ट को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। अदालत ने इस कानून के आधार पर की गई उन कार्रवाइयों को भी निरस्त किया, जो न्यायिक फैसलों के विपरीत थीं। इसके बाद राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फैसले के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए चार महीने का समय दिया है।
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