कल्पना, प्रयास और सफलता

By: Nov 2nd, 2023 12:06 am

इस सारे विवेचन का उद्देश्य सिर्फ एक ही है, और वह यह है कि आप जिस प्रकार रोजमर्रा की समस्याओं से जूझने के लिए अपनी तर्क और विश्लेषण शक्ति का प्रयोग करते हैं, उसी प्रकार अपनी कल्पनाशक्ति का प्रयोग करना भी आरंभ करें। यह आदत सायास अपनाएं। कल्पनाशक्ति का योजनाबद्ध प्रयोग आरंभ कर दिया तो आपको लाभ मिलने शुरू हो जाएंगे …

कहा जाता है कि ज्ञान शक्ति है, पर क्या आप जानते हैं कि यह एक अधूरा सच है। ज्ञान स्वयं में शक्ति नहीं है। ज्ञान, शक्ति में तभी परिवर्तित होता है जब इसे प्रयोग में लाया जाए। यही नहीं, जब इसे रचनात्मक ढंग से काम में लाया जाए तो यह एक बड़ी शक्ति बन जाता है। ज्ञान के रचनात्मक प्रयोग में कल्पना शक्ति की आवश्यकता होती है। इसीलिए मनोवैज्ञानिक आरंभ से ही कल्पना शक्ति को मानव समाज का सर्वोत्तम उपहार मानते रहे हैं। रचनात्मक कल्पना शक्ति का विकास उसी तरह संभव है जैसे हम तैरना, पढऩा या चित्र बनाना सीखते हैं। वस्तुत: लगभग हर कला को वैज्ञानिक विधि से सीखा जा सकता है। कला और विज्ञान के इस संगम ने ही मानव को अपरिमित ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। हमारी कल्पना शक्ति उतनी ही पुरानी है जितनी हमारी स्मरण शक्ति। कल्पना शक्ति के विकास के लिए बुद्धिमत्ता, ज्ञान अथवा अनुभव की उतनी आवश्यकता नहीं होती जितनी कि प्रयास, प्रेरक स्थितियों अथवा हमारी आवश्यकता की होती है। जान पर आ बनी हो तो हमारी कल्पना शक्ति ज्यादा मुखर हो जाती है। एक मनोवैज्ञानिक ने इसे एक बार सिद्ध कर दिखाया। अमेरिका की एक विश्वप्रसिद्ध कंपनी के विशाल भवन की बारहवीं मंजिल पर स्थित एक कमरे में बैठे कर्मचारियों व अधिकारियों से उन्होंने एक प्रश्न किया, ‘यदि अभी भूकंप आ जाए और यह विशाल भवन दो मिनट में गिरने वाला हो तो आप क्या करेंगे?’ अधिकांश लोग कोई सार्थक हल सुझा पाने में असमर्थ रहे।

इसके बाद वे साथ के कमरे में गए और लोगों से इधर-उधर की बातें करने लगे। इतने में उनका एक सहायक बदहवास हालत में वहां भागता आया और बोला कि भूकंप आ गया है, सारा भवन गिर रहा है। उनके सहायक का अभिनय इतना शानदार था कि कमरे में मौजूद लोगों को सहज ही उसकी बात पर विश्वास हो गया। दो मिनट के भीतर कमरे में मौजूद सभी लोग भवन से बाहर थे। कोई पाइप से लटका या खिडक़ी से कूदा, पर सभी भवन से बाहर आ गए! जीवन को खतरे में जानकर कल्पनाशक्ति मुखर हुई और जवान, बूढ़ा, औरत, मर्द, लड़कियां, स्वस्थ व शरीर से कमजोर, हर तरह का व्यक्ति, जान बचाने की जुगत में जुट गया और सफल भी हुआ। इस प्रयोग से कई बातें एक साथ सिद्ध हो गईं। पहली तो यह कि मुखर कल्पनाशक्ति कई तरह के चमत्कार कर पाने में समर्थ है। दूसरे, हर व्यक्ति कल्पनाशील हो सकता है। तीसरे, कल्पनाशक्ति की मुखरता के लिए प्रयास की सघनता (इंटेसिटी ऑफ एफर्ट) तथा संचालक शक्ति (ड्राइविंग पावर) सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। कल्पनाशक्ति के प्रयोग में उम्र कोई बाधा नहीं है। बाद में अलग-अलग प्रयोगों से यह भी सिद्ध हो गया कि उम्र के साथ कल्पनाशक्ति का क्षरण नहीं होता, बल्कि कल्पनाशक्ति का प्रयोग करते रहने वाले व्यक्ति की कल्पना बढ़ती उम्र के साथ अधिक मुखर और परिपक्व हो जाती है। वस्तुत: बड़ी उम्र के लोगों में रचनात्मक कल्पनाशक्ति के अभाव के जो कारण पाए गए, वे परंपरागत विश्वास के एकदम विपरीत निकले। हमारी शिक्षा पद्धति में केवल स्मरणशक्ति के प्रयोग पर अनावश्यक बल, और जीवन के मशीनी अंदाज ने कल्पनाशक्ति के विकास पर कुठाराघात किया है। विभिन्न परीक्षाओं एवं प्रतियोगिताओं में कल्पनाशक्ति के बजाय ज्ञान और स्मरणशक्ति का महत्व बढ़ जाने के कारण कल्पनाशक्ति के विकास का कोई प्रयास आरंभ ही नहीं हुआ। जहां कल्पनाशक्ति घटी वहां प्रयास पहले समाप्त हुआ, कल्पनाशक्ति का क्षरण बाद में आरंभ हुआ।

हमारा चेतन मस्तिष्क दो भागों में बंटा हुआ है। इसका पहला भाग तर्कशील है जो विश्लेषण और तुलना के बाद दो या अधिक विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ का चुनाव करता है, और दूसरा भाग रचनात्मक है जो मानसिक चित्र गढ़ता है, अनुमान लगाता है और नए विचारों का सृजन करता है। तर्कशील मस्तिष्क और रचनात्मक मस्तिष्क कई मामलों में एक-सा कार्य करते हैं। दोनों ही विश्लेषण और संश्लेषण (जोडऩा, मिलाना) का कार्य करते हैं। तर्कशील मस्तिष्क तथ्यों का क्रमवार विभाजन करता है, उन्हें परखता है, तुलना करता है, और तब उन्हें सिलसिलेवार करके किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है। रचनात्मक मस्तिष्क भी यही सब करता है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसका अंतिम कार्य निर्णय देना नहीं बल्कि किसी नए विचार को जन्म देने का है। वह फैसला नहीं करता, बल्कि कुछ नए विचार सुझाता है। तर्कशील मस्तिष्क और रचनात्मक मस्तिष्क में एक और बड़ा अंतर यह है कि तर्कशील मस्तिष्क सिर्फ उपलब्ध तथ्यों का विश्लेषण करता है जबकि रचनात्मक मस्तिष्क कल्पनाशक्ति के सहारे अज्ञात में प्रवेश करने का प्रयत्न करता है तथा दो और दो चार के गणितीय कार्य से भी आगे जाकर कुछ नया कर दिखाता है।

यह समझना आवश्यक है कि कल्पनाशक्ति और तर्कशक्ति एक-दूसरे के पूरक भी हैं और शत्रु भी, अत: यदि इनमें सही संतुलन न रखा जाए तो दोनों का ही नुकसान होता है। तर्कशील मस्तिष्क का कार्य मुख्यत: ऋणात्मक है। ‘अरे, इसमें तो यह दोष है’, ‘नहीं, नहीं, यह नहीं चलेगा’, ‘ऐसा भी कहीं होता है’ आदि-आदि तर्कशील मस्तिष्क की उपज हैं, जबकि रचनात्मक मस्तिष्क को मुख्यत: धनात्मक या विधायी कार्य करने होते हैं, तभी वह नए विचारों का सृजन कर पाता है। रचनात्मक मस्तिष्क बुरी से बुरी स्थिति में भी आशा की किरणें खोजता है जबकि तर्कशील मस्तिष्क हर योजना में कमियां ढूंढता है। कल्पनाशक्ति की उड़ान से उपजे कई विचार तो प्रथम दृष्टि में ही असंभव लगते हैं, लेकिन बाद में उनमें से कइयों को वास्तविकता में बदलना संभव हो जाता है। यह देखना आवश्यक है कि हमारा तर्कशील मस्तिष्क हमारे रचनात्मक मस्तिष्क में उपजने वाले विचारों की भ्रूण हत्या न कर दे, क्योंकि लगभग हर नए विचार को तुरंत तर्कसंगत ढंग से गलत सिद्ध किया जा सकता है। कई बार तो ये तर्क इतने पुख्ता लगते हैं कि व्यक्ति अपनी योजना को सिरे से ही त्याग देता है, अत: यह आवश्यक है कि विचारों को तुरंत ठीक और गलत या संभव और असंभव की कसौटी पर परखना आरंभ कर देने से पहले उसे कुछ और परिपक्व हो लेने देना चाहिए। स्मरणशक्ति एक मशीनी अंदाज का काम है। एक विषय को बार-बार दोहराते रहने से वह हमें याद हो जाता है, या एक कार्य को बार-बार दोहराने से हमें उसका अभ्यास हो जाता है।

उसमें सृजनात्मक कुछ भी नहीं है। कल्पनाशक्ति किसी विषय को दोहराते समय भी उसे दोहराने या याद करने के बेहतर और आसान तरीके खोज निकालती है। कल्पनाशक्ति का प्रयोग एक रचनात्मक क्रिया है और कल्पनाशक्ति एक रचनात्मक, सृजनात्मक शक्ति है। किसी भी समस्या से दो-चार होने पर अपने आसपास नजर दौड़ाइए। यह जानने का प्रयत्न कीजिए कि कितने लोगों को वैसी या उस जैसी समस्या से जूझना पड़ा, उन्होंने समस्या का समाधान कैसे किया, उन्हें क्या कठिनाइयां आईं, आदि-आदि। समस्या के बारे में खुद सोचिए, मित्रों और शुभचिंतकों से विचार-विमर्श कीजिए। एक-दो बार के प्रयत्न से ही आप समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे। इस सारे विवेचन का उद्देश्य सिर्फ एक ही है, और वह यह है कि आप जिस प्रकार रोजमर्रा की समस्याओं से जूझने के लिए अपनी तर्क और विश्लेषण शक्ति का प्रयोग करते हैं, उसी प्रकार अपनी कल्पनाशक्ति का प्रयोग करना भी आरंभ करें। यह आदत सायास अपनाएं। एक बार आपने कल्पनाशक्ति का योजनाबद्ध प्रयोग आरंभ कर दिया तो आपको इसके लाभ मिलने आरंभ हो जाएंगे और सफलता कुछ और आसान हो जाएगी।

पीके खु्रराना

हैपीनेस गुरु, गिन्नीज विश्व रिकार्ड विजेता

ई-मेल: indiatotal.features@gmail.com


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