कर्नाटक में सियासी संकट, शपथ के 2 दिन बाद मंत्री रेड्डी का इस्तीफा, डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

By: Jun 5th, 2026 4:35 pm

बेंगलुरु। कर्नाटक में नयी सरकार में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री आर. रामलिंगा रेड्डी ने शपथ लेने के सिर्फ दो दिन बाद ही शुक्रवार को अपने अपमान का हवाला देकर कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। बेंगलुरु बीटीएम लेआउट से आठ बार विधायक रहे और बेंगलुरु में कांग्रेस पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक श्री रेड्डी ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि श्री शिवकुमार के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि नई कैबिनेट में उन्हें सिंचाई विभाग दिया गया।

श्री रेड्डी ने इस्तीफे के पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि मेरा बार-बार अपमान किया गया है। मैं इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकता। गौरतलब है कि यह इस्तीफा नई बनी कैबिनेट के भीतर असंतोष का पहला बड़ा संकेत है और इससे विभागों के बंटवारे और सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर की अंदरूनी राजनीति को लेकर अटकलें तेज हो सकती हैं। श्री रेड्डी ने अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि श्री शिवकुमार व्यक्तिगत रूप से उनके घर आए थे और उन्हें भरोसा दिलाया था कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद बेंगलुरु विकास विभाग उन्हें सौंपा जाएगा। श्री रेड्डी के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले भी यह भरोसा दोहराया गया था, लेकिन आखिरी समय में मंत्रालय का बंटवारा बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे दो बार कहा था कि बेंगलुरु विकास विभाग मुझे दिया जाएगा। अब मैं निराश हूं। इसलिए मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं। श्री रेड्डी ने कहा कि भविष्य में वह कोई भी मंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे, भले ही उन्हें उनकी पसंद का विभाग ही क्यों न दिया जाए। वरिष्ठ नेता ने साफ किया कि उनका इस्तीफा सिर्फ मंत्री पद तक ही सीमित है और वह कांग्रेस विधायक के तौर पर काम करते रहेंगे।

रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद डैमेज-कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

विभागों के बंटवारे को लेकर वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद कर्नाटक कांग्रेस शुक्रवार को पूरी तरह से डैमेज-कंट्रोल मोड में आ गई है। इस इस्तीफे से मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में गठित नई सरकार पर शुरुआती संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बेंगलुरु में पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक के इस अचानक इस्तीफे से राजनीतिक हलचल मच गई है। इसके तुरंत बाद कांग्रेस नेतृत्व ने एकजुटता दिखाने के लिए तेजी से कदम उठाए। श्री शिवकुमार और वरिष्ठ मंत्री प्रियांक खरगे ने सार्वजनिक रूप से जोर देकर कहा कि इस मुद्दे को बातचीत के ज़रिए सुलझा लिया जाएगा। समझा जाता है कि श्री रेड्डी का इस्तीफा जल संसाधन विभाग दिए जाने को लेकर उनकी असंतुष्टि की वजह से हुआ है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया कि इस दिग्गज नेता को बेंगलुरु विकास विभाग सौंपे जाने की उम्मीद थी, जो राज्य की राजधानी में काफी राजनीतिक महत्व रखता है और जहां उनका अच्छा-खासा प्रभाव है।


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