वक्त से पहले बूढ़ा बना रही डिजिटल दुनिया; बिगड़ रहा है शरीर का ताना बाना, हो रही हैं ये समस्याएं

By: Jun 5th, 2026 8:22 pm

हमारी सेहत का हाल कुछ ऐसा है कि एक गलत आदत, एक गलत पोस्चर और शरीर का पूरा बैलेंस बिगडऩे लगता है। सुबह अलार्म बंद करने से लेकर रात की आखिरी रील तक मोबाइल, लैपटॉप, ईयरफोन और स्क्रीन हमारे साथ चिपके रहते हैं। शहर हो या गांव डिजिटल दुनिया अब हर हाथ में है, लेकिन सुविधा जब जरूरत से ज्यादा हो जाए, तो वही शरीर की तकलीफ बन जाती है। यानी जो टेक्नोलॉजी काम आसान करने आई थी, वही अब गर्दन झुका रही है, आंखें थका रही है, नींद उड़ा रही है और इनसान को वक्त से पहले बूढ़ा बना रही है। मोबाइल की छोटी स्क्रीन से शुरू हुई दिक्कत कलाई, अंगूठे, गर्दन, कंधे, कमर, आंख, कान और दिमाग तक पहुंच रही है।

पीठ, गर्दन और कंधों में बढ़ रहा है दर्द

लगातार टाइपिंग से कलाई में ‘कारपल टनल सिंड्रोम’, माउस पकड़े-पकड़े ‘माउस आर्म’ और ‘टेनिस एल्बो, फोन में गर्दन झुकाकर देखने से ‘टेक्स्ट नेक’, लैपटॉप के आगे झुककर बैठने से ‘कम्प्यूटर हंच’, लगातार स्क्रॉलिंग से ‘गेमर थंब’ और घंटों बैठे रहने से ‘डेड बट सिंड्रोम’ होने लगा है। इतना ही नहीं स्क्रीन को देर तक देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन, तेज आवाज में ईयरफोन लगाने से रिंगिंग सिंड्रोम, रात में मोबाइल चलाने से ‘स्लीप डिसऑर्डर’, फोन दूर
होते ही बेचैनी यानी ‘नोमोफोबिया’ और दिनभर बैठे-बैठे सुस्त जीवनशैली, ये सब मिलकर शरीर के पूरे सिस्टम को प्रभावित करते हैं।

कम्प्यूटर और लैपटॉप बना रहे हैं बीमार

इसकी शुरुआत बहुत चुपचाप होती है। 20-30 मिनट स्क्रीन देखने पर आंखों में सूखापन, एक घंटे बाद सिरदर्द और धुंधलापन, दो घंटे में गर्दन-कंधे में तनाव, तीन घंटे में पीठ-गर्दन दर्द, चार घंटे से ज्यादा बैठने पर कमर-कंधे जकडऩे लगते हैं और देर रात तक स्क्रीन चली तो नींद का पूरा साइकल बिगड़ जाता है। आज जरूरत टेक्नोलॉजी छोडऩे की नहीं, बल्कि उसके साथ जीने का सही तरीका सीखने की है। रोजाना थोड़ी देर योग करें, एक्सरसाइज करें, नींद में सुधार करें।

कारपल टनल सिंड्रोम

ऐसा लगातार टाइपिंग करने से होता है। जब कलाई पर दबाव पड़ता है।

माउस आर्म-टेनिस एल्बो

जो लोग कम्प्यूटर पर काम करते हैं तो माउस पकडऩे से बाजू-कोहनी दर्द होने लगती है।

टेक्स्ट नेक- लगातार फोन देखते-देखते गर्दन झुकने लगती है और इससे गर्दन में दर्द हो जाता है।

कम्प्यूटर हंच-लैपटॉप पर झुककर बैठने की आदत, इससे गर्दन और हाथ में दर्द हो सकता है।

गेमर थंब-लगातार स्क्रॉलिंग से अंगूठे में दर्द होने लगता है।

डेड बट सिंड्रोम-घंटों बैठे रहने से कूल्हों की मस्सल्स सुस्त हो जाती हैं।

डिजिटल आई स्ट्रेन-आंखों में सूखापन, जलन, धुंधलापन होना।

रिंगिंग सिंड्रोम-कानों में घंटी जैसी आवाज आती है।

स्लीप डिसऑर्डर-रात में स्क्रीन से नींद प्रभावित होती है।

नोमोफोबिया- फोन दूर होते ही बेचैनी होने लगती है।

सुस्त जीवनशैली-दिनभर बैठे रहने की आदत से जीवनशैली प्रभावित होती है।


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