पशुचारे की महंगाई बनी आफत, तूड़ी 1070 रुपए प्रति क्विंटल
खल, बिनौला और फीड के दाम भी बढ़े, दूध के दाम स्थिर रहने से बढ़ा घाटा, बेतहाशा महंगाई बढऩे से पशुपालकों के छूटने लगे पसीने
स्टाफ रिपोर्टर-गगरेट
पशुचारे की कीमतों में आए अचानक उछाल ने क्षेत्र के पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे अधिक असर तूड़ी की कीमतों में देखने को मिल रहा है। कुछ माह पहले तक सात सौ रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाली तूड़ी अब बढक़र 1070 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। सिर्फ तूड़ी ही नहीं, बल्कि खल, बिनौला और पशु फीड के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में पशुपालन अब छोटे और मध्यम वर्ग के पशुपालकों के लिए लाभ का नहीं बल्कि घाटे का सौदा बनता जा रहा है। पशुपालकों का कहना है कि एक ओर पशुओं के चारे पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर दूध के दाम लंबे समय से स्थिर बने हुए हैं। उत्पादन लागत और आमदनी के बीच बढ़ती खाई ने पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई लोग पशुपालन छोडऩे को मजबूर हो जाएंगे।
पशुपालकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार तूड़ी के दाम बढऩे की सबसे बड़ी वजह इसका घटता उत्पादन है। पहले गेहूं की कटाई हाथों से या थ्रेसर के माध्यम से होती थी, जिससे पर्याप्त मात्रा में तूड़ी तैयार हो जाती थी। लेकिन अब पंजाब के साथ-साथ जिला ऊना में भी कंबाइन हार्वेस्टर से गेहूं की कटाई का चलन तेजी से बढ़ा है। कंबाइन से कटाई होने के कारण खेतों से पहले जैसी मात्रा में तूड़ी नहीं निकल पा रही है। मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से बाजार में तूड़ी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। तूड़ी के साथ-साथ अन्य पशुचारा भी महंगा हो गया है। बाजार में खल की कीमत करीब 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जबकि बिनौला 6500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा है। पशु फीड के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ऐसे में पशुओं के संतुलित आहार की व्यवस्था करना पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने राहत के लिए मांग उठाई है, ताकि परेशानी खत्म हो सके।
दूध के दाम नहीं बढ़े, बढ़ा आर्थिक दबाव
पशुपालकों का कहना है कि चारे की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन दूध के खरीद मूल्य में उसी अनुपात में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे पशुपालन की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में दूध का समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति लीटर तक करने और गोबर खरीदने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक इन घोषणाओं पर अमल नहीं हो पाया है। इससे पशुपालकों में निराशा है।
सरकार से सस्ती दरों पर तूड़ी उपलब्ध कराने की मांग
पशुपालकों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए उन्हें सहकारी संस्थाओं अथवा सरकारी एजेंसियों के माध्यम से उचित एवं रियायती दरों पर तूड़ी उपलब्ध करवाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई तो पशुपालन का व्यवसाय गंभीर संकट में पड़ सकता है। वहीं पशुपालकों का कहना है कि महंगाई इस तरह से ही बढ़ती रही तो उनके भूखे रहने की नौबत आ जाएगी। पशु पालना बहुत ही जोखिमभरा हो जाएगा और समस्या बढ़ेगी।
गोशालाओं का संचालन भी हुआ मुश्किल
तूड़ी और अन्य पशुचारे की बढ़ती कीमतों का असर गोशालाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गौशाला संचालकों का कहना है कि प्रदेश सरकार प्रत्येक गौवंश के लिए प्रति माह 1200 रुपये की सहायता राशि देती है, लेकिन मौजूदा महंगाई में यह राशि पर्याप्त नहीं है। चारे की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण गौशालाओं का नियमित संचालन और पशुओं के लिए संतुलित आहार की व्यवस्था करना लगातार कठिन होता जा रहा है। संचालकों ने सरकार से सहायता राशि बढ़ाने और पशुचारा रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की मांग की है।
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