किसान-मजदूरों ने मांगों को लेकर नालागढ़ में किया प्रदर्शन
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने एसडीएम कार्यालय तक निकाली रैली, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-नालागढ़
किसानों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को नालागढ़ में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने संयुक्त प्रदर्शन किया। सीटू, एटक, इंटक और हिमाचल किसान सभा के आह्वान पर किसानों-मजदूरों ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से एसडीएम कार्यालय तक रैली निकाली और केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में मिड-डे मील वर्करों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। रैली नालागढ़ बाजार से होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने धरना देकर अपनी मांगें उठाईं। इस दौरान चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, न्यूनतम वेतन बढ़ाने, मनरेगा में 200 दिन रोजगार व 700 रुपए दैनिक मजदूरी देने, फसलों के एमएसपी की कानूनी गारंटी और स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई। जनसभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश महासचिव नरेश घई ने कहा कि किसान फसलों के लाभकारी मूल्य, एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने सी-2 प्लस 50 प्रतिशत के आधार पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसान और मजदूरों के मुद्दे आपस में जुड़े हैं और दोनों वर्गों की एकजुटता जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपए प्रतिमाह न्यूनतम वेतन, बिजली के निजीकरण पर रोक, कृषि भूमि को कॉरपोरेट कब्जे से बचाने तथा किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को मुआवजा व पुनर्वास देने की मांग भी उठाई। मिड-डे मील वर्करों ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा, सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग की। सीटू महासचिव मोहित वर्मा ने कहा कि नालागढ़ का औद्योगिक क्षेत्र हजारों मजदूरों की मेहनत से चलता है, लेकिन कई श्रमिक कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। संगठनों ने चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में अनिल, ओमदत्त सहित सीटू, एटक, इंटक, किसान सभा और मिड-डे मील यूनियन के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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