महंगाई का बढ़ा बोझ, थोक के साथ खुदरा दर में भी इजाफा, लगातार तीसरे महीने RBI के अनुमान से ज्यादा

By: Sep 15th, 2026 12:01 am

थोक के साथ खुदरा दर में भी इजाफा, लगातार तीसरे महीने आरबीआई के अनुमान से ज्यादा

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

देश में महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ाया है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढक़र 4.82 फीसदी हो गई है, वहीं थोक मूल्य आधारित महंगाई दर भी बढक़र 9.92 फीसदी हो गई है। महंगाई का यह आठ महीने का उच्चतम स्तर है। लगातार तीसरे महीने महंगाई दर आरबीआई के अनुमान से ज्यादा रही। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है। खाने-पीने की चीजों और रेस्तरां एवं आवास सेवाओं के दाम बढऩे से अगस्त में खुदरा मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर बढक़र 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इस साल जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत और पिछले साल अगस्त में 3.89 प्रतिशत रही थी। खाद्य खुदरा महंगाई जुलाई 2026 के 5.52 प्रतिशत से बढक़र अगस्त में 5.95 प्रतिशत पर पहुंच गई। खास बात यह रही कि एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर शहरी इलाकों की तुलना में अधिक रही। अगस्त में शहरी इलाकों में खुदरा मुद्रास्फीति 5.64 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 6.13 प्रतिशत दर्ज की गई।

खाद्य एवं पेय पदार्थों की महंगाई दर 5.66 प्रतिशत और रेस्तरां तथा आवासीय सेवाओं की 8.38 प्रतिशत रही। सोने एवं चांदी के दाम बढऩे से सौंदर्य प्रसाधन, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य वस्तु एवं सेवा वर्ग की महंगाई दर 15.17 प्रतिशत रही। पान, तंबाकू एवं नशीले पदार्थों की महंगाई दर 4.71 प्रतिशत और परिवहन सेवाओं की 4.60 प्रतिशत रही। जिन पदार्थों की महंगाई दर सबसे अधिक रही उनमें चांदी के गहने (107.11 प्रतिशत), अदरक (73.82 प्रतिशत), प्याज (48.27 प्रतिशत), लहसुन (43.60 प्रतिशत) और सोने, हीरे और प्लेटिनम के गहने (35.53 प्रतिशत) शामिल हैं। वहींं टमाटर की कीमत सालाना 31.09 प्रतिशत, आलू की 13.14 प्रतिशत, मोटर कार एवं जीप की 6.72 प्रतिशत, भिंडी की 5.41 प्रतिशत और परवल की 3.60 प्रतिशत कम हुई। इस बीच, थोक मूल्य आधारित महंगाई दर भी अगस्त में बढक़र 9.92 फीसदी हो गई है।

आम आदमी पर प्रभाव

राशन महंगा

सब्जी, मसाले और दूसरी खाद्य चीजों के दाम बढऩे से मासिक बजट बढ़ गया है।

आना-जाना भारी

महंगा कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ाता है, जिसका असर सामान की कीमतों पर भी पड़ा है। आना-जाना भी जेब पर भारी पड़ रहा है।

बचत पर दबाव

अगर आय उसी गति से नहीं बढ़ती, तो महंगाई के कारण महीने के अंत में बचने वाली रकम कम होगी।


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