बंदरों-कुत्तों के आतंक पर सडक़ पर उतरी नागरिक सभा
सिमिट्री में जान गंवाने वाली महिला के परिवार को पांच लाख मुआवजे की मांग, नगर निगम को दी आंदोलन की चेतावनी
स्टाफ रिपोर्टर-शिमला
शिमला शहर में बंदरों, लंगूरों और आक्रामक कुत्तों के बढ़ते आतंक के खिलाफ सोमवार को शिमला नागरिक सभा ने प्रदर्शन किया। सभा ने सिमिट्री क्षेत्र में बंदरों के हमले के बाद छत से गिरकर जान गंवाने वाली महिला के परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की मांग उठाई। नागरिक सभा ने कहा कि शहर में मानव-पशु संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शन को नागरिक सभा के अध्यक्ष जगमोहन ठाकुर, सचिव विवेक कश्यप सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बंदरों, लंगूरों और कुत्तों के हमलों का सबसे अधिक खतरा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को है। सिमिट्री की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि महिला अपनी छत पर पानी देखने गई थी। इसी दौरान बंदरों ने उस पर हमला कर दिया, जिससे वह नीचे गिर गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सभा ने कहा कि शहर के कई हिस्सों में लोग खुले में बंदरों, लंगूरों और कुत्तों को खाना खिलाते हैं।
इससे ये पशु रिहायशी क्षेत्रों में ही टिके रहते हैं और कई स्थानों को अपना स्थायी अड्डा बना चुके हैं। वक्ताओं ने बंदरों और कुत्तों की नसबंदी अभियान पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि वर्षों से नसबंदी की बात हो रही है, लेकिन पशुओं की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं दिख रही। कई कुत्ते आक्रामक हो चुके हैं। ऐसे पशुओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित शेल्टर में रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। सभा ने स्मार्ट सिटी के तहत बने फुटब्रिजों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कई फुटब्रिज कुत्तों और बंदरों के आश्रय स्थल बन गए हैं। प्रदर्शन के बाद जगमोहन ठाकुर की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम प्रशासन से मुलाकात कर मुआवजा देने, खुले में पशुओं को खाना खिलाने वालों पर कार्रवाई, आक्रामक पशुओं को सुरक्षित शेल्टर में रखने और नसबंदी अभियान तेज करने की मांग की। समस्या का समाधान नहीं होने पर बड़ा आंदोलन और निगम के घेराव की चेतावनी दी गई।
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