पोर्टल से सेब की खरीद में आई पारदर्शिता, MIS के तहत हिमाचल में अब तक खरीदा 8000 मीट्रिक टन सेब
राज्य में इस साल 31 अक्तूबर तक जारी रहेगी सेब खरीद प्रक्रिया
कार्यालय संवाददाता-शिमला
राज्य सरकार द्वारा एमआईएस के तहत अब तक 8,000 मीट्रिक टन से अधिक सेब की खरीद की जा चुकी है, वहीं 17 हजार से अधिक बागवान एचपीएमआईएस पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके हैं। राज्य में एक अगस्त से 213 सेब संग्रहण केंद्रों पर सेब खरीद प्रक्रिया जारी है। यह सेब संग्रहण केंद्र एचपीएमसी और हिमफेड द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। 31 अक्तूबर इन केंद्रों में सेब खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस सेब सीजन में एक महत्त्वपूर्ण पहल करते हुए एमआईएस की पूरी प्रक्रिया को एचपीएमआईएस के माध्यम से डिजिटलाइज्ड किया गया है। इस प्रणाली के तहत बागवानों का पंजीकरण, सेब की खरीद, डिजिटल रसीद, परिवहन, प्रसंस्करण, निगरानी और भुगतान शामिल हैं, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बागवानों के हितों की रक्षा करने तथा राज्य की बागवानी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने को विशेष प्राथमिकता दी है। एमआईएस योजना बाजार में सेब की अधिक आवक और बाजार में मंदी के समय बागवानों को राहत प्रदान करती है, मूल्यवर्धन को बढ़ावा देती है तथा निम्न गुणवत्ता वाले फलों की खुले बाजार में आवक को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।
उन्होंने कहा कि मंडी मध्यस्थता योजना को बाजार में मंदी के दौरान सेब बागवानों को समय पर सहायता प्रदान करने और सेब के निस्तारण के लिए एक सुनिश्चित माध्यम उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। एचपीएमआईएस एंड्रॉयड और आईओएस एप्लीकेशन के माध्यम से उपलब्ध है। बागवानों के लिए एक बार पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। इस वर्ष पंजीकरण करवाने वाले बागवानों को आगामी वर्षों में दोबारा पंजीकरण करवाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन्हें केवल एचपीएमआईएस के माध्यम से संबंधित सेब संग्रहण केंद्र को सेब जमा करवाने की सूचना देनी होगी। एचपीएमआईएस पोर्टल पर बागवान स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कॉमन सर्विस सेंटर/लोक मित्र केंद्रों अथवा ग्राम पंचायतों की सहायता से भी पंजीकरण करवा सकते हैं। शिमला जिले में पंजीकरण की सुविधा प्रदान करने के लिए 681 लोक मित्र केंद्र उपलब्ध हैं।
डिजिटल माध्यम से आसान हुई भुगतान प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पंजीकरण के बाद बागवानों को सेब की फसल निर्धारित सेब संग्रहण केंद्र पर लानी होगी। एमआईएस के तहत स्वीकृत की गई सेब फसल की मात्रा एचपीएमआईएस में डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। इसकी रसीद भी जारी की जाएगी। रसीद की एक प्रति बागवान को उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर उपलब्ध करवाई जाएगी। पात्र एमआईएस भुगतान का सत्यापन और योजना की निर्धारित शर्तों की पूर्ति के बाद प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बागवान के पंजीेकृत बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाएगा। बागवानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एचपीएमआईएस में उनका मोबाइल नंबर और बैंक खाते का विवरण सही दर्ज हो।
मंडियों के चक्कर लगाने से मिलेगी निजात
डिजिटलीकरण से बागवानों को रिकॉर्ड और रसीदें जमा करवाने के लिए बार-बार एचपीएमसी और हिमफेड के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके अतिरिक्त एचपीएमसी के पराला (शिमला), परवाणू (सोलन) और जड़ोल (मंडी) स्थित प्रसंस्करण संयंत्रों में सेब की खरीद, परिवहन और प्रसंस्करण की रियल-टाइम निगरानी भी संभव हुई है। रसीद, चालान, रिपोर्ट और रजिस्टर डिजिटल रूप से तैयार होने से पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हुई है और खरीदे गए सेब के शीघ्र निपटान में भी सुविधा मिली है। बागवानों को यह परामर्श दिया गया है कि वे शीघ्र एचपीएमआईएस पर अपना पंजीकरण करवाएं। साथ ही मोबाइल नम्बर और बैंक खाते का विवरण अपडेट रखें तथा सेब केवल निर्धारित सेब संग्रहण केंद्र पर ही जमा करवाएं। बागवान डिजिटल रूप से जारी रसीद को अपने रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखें।
—जय ठाकुर
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