तडक़े ही हिल गया हिमाचल, सुबह 4:36 पर लगे भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 4.1 रही तीव्रता

By: Oct 17th, 2026 10:58 am

कार्यालय संवाददाता—शिमला

हिमाचल प्रदेश में शनिवार तडक़े भूकंप के झटकों से धरती कांप उठी। जब अधिकतर लोग गहरी नींद में सो रहे थे, उसी दौरान सुबह 4 बजकर 36 मिनट 27 सेकंड पर आए भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 मापी गई। इसका केंद्र शिमला से करीब 40 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में नारकंडा-कुमारसैन क्षेत्र में जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया।

झटके महसूस होते ही कुछ लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, शुरुआती जानकारी के अनुसार भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। हिमालयी क्षेत्र में भारतीय भूगर्भीय प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियाई प्लेट से टकरा रही है। इस प्रक्रिया के कारण धरती के भीतर चट्टानों और भूगर्भीय दरारों में दबाव जमा होता रहता है। जब यह दबाव अचानक मुक्त होता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है और धरती की सतह पर कंपन महसूस होता है। इसी प्रक्रिया को भूकंप कहा जाता है।

ऐसे आता है भूकंप

धरती की ऊपरी परत कई बड़ी और छोटी भूगर्भीय प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें बेहद धीमी गति से लगातार खिसकती रहती हैं। जब इनके बीच टकराव, खिंचाव या घर्षण के कारण चट्टानों पर दबाव बढ़ता है, तो वे कुछ समय तक इस दबाव को सहन करती रहती हैं, लेकिन दबाव सीमा से अधिक होने पर चट्टानें भूगर्भीय भ्रंश के सहारे अचानक खिसक सकती हैं। इससे पैदा हुई ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में चारों ओर फैलती है और जमीन हिलने लगती है।भूकंप के धरती के भीतर जहां से शुरू होने के स्थान को उद्गम केंद्र और उसके ठीक ऊपर धरती की सतह पर स्थित स्थान को अधिकेंद्र कहा जाता है। अधिकेंद्र के आसपास झटके ज्यादा महसूस हो सकते हैं, लेकिन नुकसान की गंभीरता भूकंप की तीव्रता, गहराई, इमारतों की मजबूती और स्थानीय जमीन की प्रकृति पर भी निर्भर करती है।


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