भानु धमीजा

भानु धमीजा लेखक ( चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) शहरी स्थानीय निकायों को स्वशासन की संस्थाएं बनाने को 20 वर्ष पूर्व किया गया 74वां संविधान संशोधन असफल रहा है। लेकिन अब उम्मीद दिख रही है। तिरुवंनतपुरम से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने इन विकारों को दूर करने के

  भानु धमीजा लेखक ( चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं ) सच्चाई यह है कि ‘‘अनेकता में एकता’’ के भेस में विविध जनता को एक संघ में बलपूर्वक शामिल करने से बात नहीं बनती। बात इससे बनेगी कि उन्हें एक मजबूत संघीय सरकार के बख्तरबंद समझौते-नेहरू के ‘‘जोड़ने वाले

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं सच्चाई यह है कि भारत की नौकरशाही, हर अन्य चीज की तरह, भारत की कमजोर राजनीतिक व्यवस्था से त्रस्त है। इस व्यवस्था में मूलभूत कमजोरियां – शक्तियों का सम्मिश्रण, एकल नियुक्ति  प्राधिकारी, राजनेताओं से मंत्री बनाना, विधायी दूरदृष्टि न

भानु धमीजा सीएमडी, ‘दिव्य हिमाचल’ लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं दरअसल, राज्य सरकारों को केंद्र के अधीन लाना, या इसके विपरीत, राज्य चुनावों को केंद्र सरकार के प्रति जनमत संग्रह बनाना संघवाद के मूल सिद्धांत के विपरीत है। सच्चा संघवाद दोनों सरकारों को समानता से महत्त्वपूर्ण बनाता है।

भानु धमीजा (लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) अंबेडकर ने ‘संयुक्त राज्य भारत’ का अपना प्रस्ताव संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष का कार्य प्रारंभ करने से सात माह पूर्व प्रस्तुत किया था। उस समय वह मौलिक अधिकारों के लिए बनाई गई एक उपसमिति के एक सदस्य भर थे। 27

भानु धमीजा (लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) भारत को कमजोर कानून नसीब होते हैं। सुघड़ सियासत के बल पर खराब कानून पास हो जाते हैं, जबकि खरे कानून छटपटाते रहते हैं अथवा नामंजूर हो जाते हैं। कानूनों की कल्पना कमजोर होती है और आलेख खौफनाक। 2013 में जब

भानु धमीजा (लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) सच्चाई यह है कि एक अकेले शक्ति केंद्र और बिना निगरानी वाली व्यवस्था में सबको भ्रष्टाचार की पूरी छूट है। परिणाम जाहिर होने चाहिए थे। संविधान अपनाने के तीन दशक के भीतर ही, प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने घोषणा की कि, ‘‘बाड़

भानु धमीजा (लेखक, चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं) इस मान्यता का कोई उचित आधार नहीं है कि अमरीकी व्यवस्था सत्तावादी है या तानाशाही प्रवृत्तियों को बढ़ावा देती है। अमरीकी संविधान बनाने का मुख्य उद्देश्य ही यह था कि शक्तियां किसी एक के हाथ में होने की कोई संभावना न

भानु धमीजा ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के अलावा चर्चित किताब ‘व्हाई इंडिया नीड्ज दि प्रेजिडेंशियल सिस्टम’ के रचनाकार हैं। श्री धमीजा अमरीकी वित्तीय और मीडिया क्षेत्र के व्यापक अनुभवों से समृद्ध हैं और पिछले अठारह वर्षों से इन्हीं अनुभवों को भारतीय कलेवर देकर अपनी जड़ों को सींच रहे हैं।