आस्था

भारत में भगवान श्रीकृष्ण के कई अद्भुत और रहस्यमयी मंदिर हैं, जिनके बारे में अलग-अलग मान्यताएं भी हैं। भगवान श्रीकृष्ण का ऐसा ही एक मंदिर कर्नाटक के उडुपी में स्थित है, जहां कृष्ण भक्त बाल-गोपाल के दर्शन खिडक़ी से करते हैं।

देशभर में स्वाइन फ्लू के केस लगातार रफ्तार पकड़ रहे हैं। बदलते मौसम और बढ़ती उमस में जुकाम होना आम बात है। लेकिन कुछ ऐसे ही लक्षण आपको एच1एन1 वायरस भी देता है, जिसे हम स्वाइन फ्लू कहते हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच जागरूक रहना जरूरी है, क्योंकि डाक्टरों के

बाबा हरदेव गतांक से आगे… अत: सद्गुरु गुरसिख को मिटना सिखाता है क्योंकि मिटने के प्रेम का प्रादुर्भाव होता है। इसलिए सद्गुरु को कुम्हार एवं धोबी की संज्ञा दी गई है। कुम्हार पहले तो मिट्टी को रौंदता है फिर उसे आकार देता है। सद्गुरु धोबी की भांति जन्मों-जन्मों की मैल उतारकर जीवन को उज्ज्वल कर

श्रीश्री रवि शंकर ध्यान हमारे आसपास सकारात्मक और सामंजस्य की ऊर्जा का सृजन करता है। अब तक काफी शोध हुआ है कि कैसे ध्यान उच्च रक्तचाप, हृदय की समस्याएं, चमड़ी के रोगों में और अन्य विभिन्न समस्याओं में मददगार है। यह शारीरिक बीमारियों और मानसिक व्याधियों को रोकने में बहुत सहायक है… आज की इस

* गर्म पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर 15 से 20 बार कुल्ला करने से मुंह के छालों से राहत मिलती है। * मक्खन में थोड़ा सा केसर मिलाकर रोजाना होंठों पर लगाने से काले होंठ गुलाबी होने लगते हैं। * गाजर के रस में दो चम्मच शहद या फिर 1/2 चम्मच अदरक का रस

हिमोग्लोबिन रेड ब्लड सैल्स में आयरन से भरपूर प्रोटीन होता है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है। कम हिमोग्लोबिन आयरन की कमी, विटामिन की कमी, खून की कमी और कई मेडिकल कंडीशन से जुड़ा हो सकता है। बैलेंस्ड डाइट के साथ, पूरे न्यूट्रीशन को सपोर्ट करने के लिए डाइट में कुछ न्यूट्रीएंट्स से भरपूर

राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंज जी जैसा बोओगे वैसा पाओगे, इस मशहूर लोक कहावत के आधार पर बचपन से ही हमें माता-पिता एवं शिक्षकों के द्वारा यह सीख दी जाती है कि अपना चरित्र एवं चाल चलन ऐसे रखें जो सभी के सन्मान एवं प्यार के पात्र आप बन सको। इसीलिए जब कोई बच्चा शरारत करता है,

जे.पी. शर्मा, मनोवैज्ञानिक नीलकंठ, मेन बाजार ऊना मो. 9816168952 इनसानी मूल प्रवृत्तियों व फितरती मनोमानसिकताओं में एक डर की भावना भी होती है जिसमें प्रत्यक्ष व परोक्ष दोनों किस्म की भावनाएंं होती हैं। समक्ष नजर आने वाले डर प्रत्यक्ष होते हैं, अनजाने डर परोक्ष रहते हैं, जो सर्वाधिक असुरक्षा भावना पैदा करते हैं। यही डर

अशोकधाम के वर्तमान मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन 11 फरवरी 1993 को जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने किया था। आज मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, नंदी और देवी दुर्गा के मंदिर भी हैं...