आस्था

जे.पी. शर्मा, मनोवैज्ञानिक नीलकंठ, मेन बाजार ऊना मो. 9816168952 सभ्य समाज के समानान्तर भावार्थ वाले शब्द हैं संगठित समूह, सहयोग, सौहार्द, सहायता से ओत-प्रोत, सकारात्मक सोच वाली सामुदायिक भावना वाले मानव समूह, जिनकी परस्पर सांझाी सद्भावना ने ही सभ्य समाज की सहज संरचना स्थापित की है। समाज की संरचना के कालखंड से लेकर वर्तमान तक

स्वामी रामस्वरूप इसी स्थिति का वर्णन महाभारत काल में व्यास मुनि जी अर्जुन के द्वारा भगवद्गीता में उच्चारण करा रहे हैं। हमें सदा ईश्वर से डरकर रहना चाहिए। वह डर क्या है? कि यदि हम ईश्वर के न्याय से नहीं डरेंगे तो चारों वेद कहते हैं जैसा कि सामवेद मंत्र 446 में कहा कि परमेश्वर

ओशो प्रतिस्पर्धा छोड़ो और तुलना छोड़ो और तुम स्वयं बन जाओगे। तुलना जहर है। तुम हमेशा यही सोचते रहते हो कि दूसरा क्या कर रहा है। उसके पास एक बड़ा घर और एक बड़ी कार है और तुम दुखी हो। उसके पास एक सुंदर स्त्री है और तुम दुखी हो। और वह सत्ता और राजनीति

श्रीश्री रवि शंकर सरस्वती कोई व्यक्ति नहीं है। चेतना का वह तत्त्व जो कभी नीरस नहीं होता, बल्कि जीवन के उत्साह और सार से परिपूर्ण होता है, वह सरस्वती है। देवी सरस्वती ज्ञान, संगीत और ध्यान का अवतार हैं। विद्या की देवी सरस्वती का स्वरूप एवं संकल्पना विश्व में अद्वितीय है। यदि हम देवी सरस्वती

बसंत पंचमी भारत में हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा संपूर्ण भारत में बड़े उल्लास के साथ की जाती है। इस दिन स्त्रियां पीले वस्त्र धारण करती हैं। बसंत पंचमी के पर्व से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। शांत, ठंडी, मंद वायु, कटु शीत का स्थान ले लेती है तथा सबको नवप्राण व उत्साह से स्पर्श करती है...

नर्मदा जयंती मां नर्मदा के जन्मदिवस यानी माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है। नर्मदा जयंती मध्य प्रदेश राज्य के नर्मदा नदी के तट पर मनाई जाती है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को शास्त्रों में नर्मदा जयंती कहा गया है। नर्मदा अमरकंटक से प्रवाहित होकर रत्नासागर में समाहित हुई है और अनेक जीवों का उद्धार भी किया है...

भीष्माष्टमी अथवा भीष्म अष्टमी का व्रत माघ माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। महाभारत में वर्णन है कि भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान था। माघ शुक्लाष्टमी तिथि को बाल ब्रह्मचारी भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने प्राण छोड़े थे। उनकी पावन स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन प्रत्येक हिन्दू को भीष्म पितामह के निमित्त कुश, तिल, जल लेकर तर्पण करना चाहिए, चाहे उसके माता-पिता जीवित ही क्यों न हों...

भारत के मंदिर, उनकी भव्यता विश्व प्रसिद्ध है। इसलिए देश-दुनिया से लोग इन मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं। साथ ही इन मंदिरों की खूबसूरती वास्तुकला भी आत्मिक शांति देने वाली होती है।

मां सरस्वती जी का जन्मदिन जिसे हम बसंत पंचमी के रूप में मनाते हैं। इस साल 14 फरवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन देश भर में माता सरस्वती की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है।