ज्ञान के आकलन की पेचीदगी

By: May 30th, 2017 12:07 am

newsडा. भरत झुनझुनवाला

(लेखक, आर्थिक विश्लेषक एवं टिप्पणीकार हैं)

शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के दो स्तर हैं-रटंत विद्या एवं समझ। देखा जाता है कि कक्षा में सर्वश्रेष्ठ अंक पाने वाले छात्र अकसर जीवन में पीछे  रह जाते है। एक सर्वश्रेष्ठ अंक पाने वाला बैंक में क्लर्क के पद पर ही पहुंच सका। दूसरा दुकान में मेवा बेच रहा है। इनके सामने कम अंक पाने वाला एक छात्र अमरीका में शिक्षा प्राप्त कर आज किसी अमरीकी कंपनी मे ऊंचे पद पर कार्यरत है। कारण कि बोर्ड द्वारा रटंत ज्ञान की परीक्षा ली जा रही थी…

देश के तमाम तकनीकी कालेजों मे दाखिले की सम्मिलित प्रवेश परीक्षा जनवरी 2018 मे प्रारंभ किए जाने की संभावना है। वर्तमान में आइआईटी, आईआईएम एवं दूसरे उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए अलग-अलग परीक्षाएं संपादित की जाती हैं। मानव संसाधन मंत्रालय ने नई व्यवस्था के अंतर्गत इन सभी परीक्षाओं को संपादित करने के लिए नेशनल टेस्टिंग सर्विस स्थापित की है। इस संस्था द्वारा पूरे देश में सभी तकनीकी संस्थानों में प्रवेश के पहले चरण की परीक्षा संपादित की जाएगी। सरकार के इस कदम का स्वागत है। वर्तमान में छात्रों को अलग-2 संस्थाओं मेंं प्रवेश के लिए अलग-अलग परीक्षाओं मे बैठना पड़ता है जिसमें परीक्षकों तथा छात्रों की ऊर्जा का क्षय होता है।

इस परीक्षा का अप्रत्यक्ष लाभ होगा कि विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्डों द्वारा दी जा रही शिक्षा का सर्वव्यापी मूल्यांकन हो सकेगा। जैसे वर्तमान में  राज्य ‘क’ के छात्र द्वारा हासिल 90 प्रतिशत अंक दूसरे राज्य ‘ख’ के छात्र द्वारा हासिल 60 प्रतिशत अंक के बराबर हो सकते हैं चूंकि राज्य ‘क’ द्वारा आसान मार्किंग की जाती है अथवा नकल करने की छूट दी जाती है। सभी राज्यों के छात्रों द्वारा एक ही परीक्षा मे बैठने से राज्यों का तुलनात्मक मूल्यांकन स्वयं हो जाएगा। संभव है कि राज्य ‘क’ के 100 मे से 30 छात्र ही परीक्षा में पास हों जबकि इनके द्वारा 90 प्रतिशत अंक हासिल किए गए थे। राज्य ‘ख’ के 60 प्रतिशत छात्र पास हों जबकि इनके द्वारा केवल 60 प्रतिशत अंक हासिल किए गए थे। इसी प्रकार प्राइवेट एवं स्वायत्त कालेजों का सहज ही मूल्यांकन हो जाएगा। स्पष्ट हो जाएगा कि किस कालेज द्वारा उत्तम शिक्षा प्रदान की जा रही है। प्रवेश लेने के पहले आवेदक आनलाइन देख सकेगा कि किस विद्यालय के छात्रों का सम्मिलित प्रवेश परीक्षा में परिणाम अच्छा रहा है। उन विद्यालयों में वह दाखिला ले सकेगा।

लेकिन इस व्यवस्था को लागू करने में सावधानी बरतने की भी जरूरत है। शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के दो स्तर हैं-रटंत विद्या एवं समझ। देखा जाता है कि कक्षा में सर्वश्रेष्ठ अंक पाने वाले छात्र अकसर जीवन में पीछे  रह जाते है। एक सर्वश्रेष्ठ अंक पाने वाला बैंक में क्लर्क के पद पर ही पहुंच सका। दूसरा दुकान में मेवा बेच रहा है। इनके सामने कम अंक पाने वाला एक छात्र अमरीका में शिक्षा प्राप्त कर आज किसी अमरीकी कंपनी मे ऊंचे पद पर कार्यरत है। कारण कि बोर्ड द्वारा रटंत ज्ञान की परीक्षा ली जा रही थी। जो छात्र विषय को रट रहा था उसे अच्छे अंक मिले, परंतु जीवन में वह फेल हुआ चूंकि उसकी सोचने की क्षमता सीमित थी। दूसरा छात्र सोचता और विषय को समझता था इसलिए रटंत परीक्षा में उसे अंक कम मिले, परंतु जीवन में वह सफल हुआ। इस उदाहरण से समस्या स्पष्ट हो जाती है। यदि नेशनल टेस्‍टिग सर्विस ने रटंत विद्या की परीक्षा ली, तो संपूर्ण देश रटंत विद्या को अपनाने पर मजबूर हो जाएगा।

दूसरी समस्या संस्कृति की है। प्रश्न पत्र में दिए गए प्रश्न किसी विशेष सांस्कृतिक परिपेक्ष में बनाए जाते हैं। जैसे पूछा जाए कि तीन गाय तीन स्थान पर खड़ी हैं-उनके बीच की भूमि का क्षेत्रफल निकालो। अथवा पूछा जाए कि तीन कार तीन स्थान पर खड़ी है-उनके बीच का क्षेत्रफल निकालो। दोनों प्रश्न बिलकुल एक समान हैं। परंतु ग्रामीण छात्र पहले प्रश्न को आसानी से समझ सकेगा जबकि शहरी छात्र दूसरे प्रश्न को। इसी प्रकार प्रश्नों को बनाने में गरीब अथवा अमीर, स्त्री अथवा पुरुष, दलित अथवा सवर्ण आदि के भेद होते हैं। संपूर्ण देश में एक ही परीक्षा व्यवस्था का झुकाव किसी एक वर्ग के पक्ष में हुआ, तो दूसरा पक्ष सहज ही कमजोर हो जाएगा। अपने देश के शिक्षक ज्यादातर मध्यम वर्ग के सवर्ण शहरी पुरुष होते हैं। इनके द्वारा इसी सांस्कृतिक परीप्रेेक्ष में प्रश्न बनाए जाते जाएंगे। तदानुसार दूसरे वर्ग और पिछड़ते जाएंगे।

इसी प्रकार की समस्या प्रश्नों के विषयों को निर्धारित करने में है। एक छात्र ने इतिहास पढ़ा है दूसरे ने गणित। दोनों की परीक्षा एक ही प्रश्न पत्र से करना अत्यंत कठिन ही नही, बल्कि लगभग असंभव है। वर्तमान मे आईआईएम की परीक्षा में गणित को ज्यादा महत्त्व देने के कारण आईआईएम में इंजीनियर ज्यादा संख्या में प्रवेश पाते हैं। इसका अर्थ यह नही कि इंजीनियर ज्यादा बुद्धिमान होते हैं। इतिहास का छात्र ज्यादा बुद्धिमान हो तो भी प्रश्न पत्र के ढांचे के कारण उसे आईआईएम में प्रवेश कम ही मिलता है। पूरे देश में एक ही परीक्षा व्यवस्था लागू करने में समस्या है कि इस व्यवस्था का झुकाव किसी एक संस्कृति अथवा विषय की ओर होने पर पूरे देश को शिक्षण संस्थाओं को उसी तरफ  झुकना होगा अन्यथा उनके छात्र सभी प्रवेश परीक्षाओं से बाहर हो जाएंगे। शिक्षा की विविधता समाप्त हो जाएगी।

इन समस्याओं का एक हल आंतरिक है। सरकार द्वारा नेशनल टेस्टिंग सर्विस को हिदायत दी जा सकती है कि ग्रामीण एवं शहरी, दलित एवं सवर्ण, स्त्री एवं पुरुष आदि वर्गों के बीच संतुलन बना कर रखे। इसी प्रकार विभिन्न विषयों जैसे इतिहास एवं गणित के बीच संतुलन बनाकर रखे। परंतु सरकार ऐसे निर्देश दे, तो भी उन्हें लागू करना अत्यंत कठिन है चूंकि प्रश्न पत्र बनाने वाले किसी विशेष परिप्रेक्ष से आते हैं और उनके द्वारा बनाए गए प्रश्न पत्र सहज ही उस परिप्रेक्ष की ओर झुके होते हैं। इस समस्या का दूसरा समाधान बाहरी है। एक नेशनल टेस्टिंग सर्विस के स्थान पर दो या तीन समानांतर सर्वव्यापी परीक्षा व्यवस्थाएं बनाई जा सकती हैं। जैसे आज देश में क्वालिटी परीक्षण के लिए दिए जाने वाले इंटरनेशनल स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आईएसओ) के प्रमाण पत्र कई संस्थाओं द्वारा समानांतर उपलब्ध कराए जाते हैं। अथवा अर्थव्यवस्था की रेटिंग मूडीज, फिव तथा स्टैंडर्ड एंड पूर नामक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा समानांतर प्रक्रिया में की जाती है अथवा चुनाव के सर्वेक्षण कई संस्थाओं द्वारा समानांतर किए जाते हैं। ऐसे में यदि एक संस्था किसी विशेष पूर्ग्रह से ग्रस्त हो गई, तो दूसरी संस्थाएं उनके प्रभाव को काट देंगी। नेशनल टेस्टिंग सर्विस स्थापित करने का स्वागत है। परंतु इस व्यवस्था के रटंत विद्या को अपनाने, किसी विशेष सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को आधार बनाने, अथवा किसी विशेष विषय के प्रति झुकाव रखने से पूरे देश की शिक्षण व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। इसलिए इस प्रकार की दो या तीन समानांतर व्यवस्थाएं बनानी चाहिए। निजी क्षेत्र को भी ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाने का काम दिया जा सकता है। ऐसा करने से संपूर्ण देश में एक स्तर की परीक्षा का लाभ मिलेगा। साथ-साथ नेशनल टेस्टिंग सर्विस के असफल हो जाने की समस्या से भी हम बच सकेंगे।

ई-मेल  [email protected]

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं? निःशुल्क रजिस्टर करें !

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या मल्टीटास्क वर्कर्स की तरह परोक्ष भर्तियां जायज हैं?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV